उज्जैन। ‘सरल काव्यांजलि आदर्शवादी संस्था है और हमें दो संकल्प आज लेना ही चाहिए- हम हस्ताक्षर हिन्दी में ही करेंगे और इंडिया के स्थान पर भारत शब्द को ही उपयोग में लेंगे।
‘उक्त विचार ख्यात शिक्षाविद प्रोफेसर राकेश ढंड ने भारतीय ज्ञानपीठ में आयोजित सरल काव्यांजलि संस्था की मासिक गोष्ठी में व्यक्त किये। जानकारी देते हुए संस्था की डॉक्टर नेत्रा रावणकर ने बताया कि विशेष अतिथि शासकीय धन्वंतरि आयुर्वेदिक महाविद्यालय के प्राचार्य डॉक्टर ओ.पी.व्यास और ख्यात पत्रकार प्रकाश त्रिवेदी थे।
इस अवसर पर नगर निगम के वरिष्ठ एल्डरमैन अशोक देवड़ा का स्मृति चिन्ह, शॉल, श्रीफल प्रदान कर सम्मान किया गया।
तत्पश्चात आयोजित काव्य गोष्ठी में डॉ. पुष्पा चौरसिया, सन्तोष सुपेकर, सुगनचंद्र जैन, राजेन्द्र देवधरे ‘दर्पण’, वी. एस. गहलोत, मानसिंह ‘शरद’, प्रियंका पंड्या, डॉ. रफीक नागोरी, अमित जैन, डॉ.प्रभाकर शर्मा, माया बदेका, धनसिंह चौहान, डॉ. रश्मि मोयदे, अमृता उषारिया, डॉ. आर. पी.तिवारी, हर्ष सैनी, शारदाश्री और प्रफुल्ल शुक्ला ने राष्ट्रभक्ति और पावस ऋतु केंद्रित रचनाओं का पाठ किया।
संस्था की परम्परानुसार राष्ट्रकवि श्रीकृष्ण ‘सरल’ जी की कविता’ युग तुमसे वरदान मांगता ‘का वाचन नितिन पोल ने किया। स्वागत भाषण सन्तोष सुपेकर ने दिया तथा इस माह के जन्म दिवस वाले सदस्य संजय जौहरी का विशेष स्वागत हुआ।
प्रारम्भ में माँ सरस्वती की स्तुति अमित जैन ने की। अतिथि स्वागत अध्यक्ष डॉ.संजय नागर, प्रदीप ‘सरल’, एम.जी. मोयदे, सुमन नागर, लीना उपाध्याय, जयंती बदेका, रमेशचंद्र बड़गोत्या और प्रवीण पंड्या ने किया।
संचालन हर्ष सैनी ने किया और अंत में आभार राजेंद्र देवधरे ने माना।
