उज्जैन। समझते तुम मेरे बारे में कैसे, तुमने मुझ को तो परखा नहीं था, संवरता किस तरह मैं कहिये आखिर, मेरे कमरे में आईना नहीं था! सरल काव्यांजलि की मासिक गोष्ठी में शायर डॉ. रफ़ीक़ नागौरी ने उक्त पंक्तियाँ पढ़कर गोष्ठी को नयी ऊँचाइयाँ प्रदान की। जानकारी देते हुए संस्था के विजय गोपी ने बताया कि कार्यक्रम की अध्यक्षता, संरक्षक डॉ. पुष्पा चौरसिया ने की। अतिथि प्रेमचंद सृजन पीठ के निदेशक मुकेश जोशी तथा प्रदीप सरल थे।
सबसे पहले प्रदीप सरल की अध्यक्षता वाली संस्था की नवीन कार्यकारिणी का स्वागत हुआ। तत्पश्चात आयोजित काव्य गोष्ठी में सन्तोष सुपेकर, मानसिंह शरद, आशीष श्रीवास्तव अश्क, महेंद्र सिंह भदौरिया, सुगनचंद्र जैन, अमृता उषारिया, डॉ. नेत्रा रावणकर, डॉ. वंदना गुप्ता, डॉ. राम प्रकाश तिवारी, वी.एस. गेहलोत साकित, हर्ष सैनी, अमित जैन, तरुण उपाध्याय, संगीता तल्लेरा, डॉ. रश्मि मोयदे, दिलीप जैन, अशोक रक्ताले तथा डॉ. अखिलेश चौरे ने अपनी प्रभावी रचनाएँ सुनाई। आशागंगा शिरढ़ोणकर ने संतोष सुपेकर के उपन्यास ढाई इंच पर दौड़ती जिंदगी की समीक्षा पढ़ी।
प्रारम्भ में राष्ट्रकवि श्रीकृष्ण सरल जी की कविता अपना देश संवारे हम का वाचन सीमा पंड्या ने किया। अतिथि स्वागत डॉ. संजय नागर, डॉ. उर्मि शर्मा तथा एम.जी. मोयदे ने किया। संचालन डॉ. रफीक नागोरी ने किया। हाल ही में दिवंगत अभिनेता नाना पाटेकर, नेत्री माया राजेश त्रिवेदी को श्रद्धांजलि दी गयी और अंत में धन्यवाद ज्ञापन सन्तोष सुपेकर ने किया।
