जिस जीव को आप बना नहीं सकते हो, जिसकी तकलीफ आप दूर नहीं कर सकते हो, उसको मारने के हकदार आप नहीं हो
आगरा, उत्तर प्रदेश परम् पूज्य परम् सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज ने सतसंग में कहा कि जीव की हत्या करना बहुत बड़ी बुराई है। जिस जीव को आप बना नहीं सकते हो, जिसकी तकलीफ आप दूर नहीं कर सकते हो, उसको मारने के हकदार आप नहीं हो। सब में उस प्रभु की अंश जीवात्मा है, वह तो बस सजा भोगने के लिए उन योनियों में डाल दी जाती हैं। जितने भी जानवर हैं, वे भी कभी मनुष्य शरीर में थे लेकिन जब उनसे चूक हो गई तब उन्हें उन योनियों में जाना पड़ा। इसीलिए आप सब पर दया करो,
“दया धर्म तन बसे शरीरा, ताकर रक्षा करे रघुवीरा”
कहा गया, “बिस्मिल्लाह ए रहमान ए रहीम”
जितने भी पूरे फकीर हुए है, सब ने कहा है कि सब जीवों में उस खुदा की रूह है, उनको तकलीफ मत दो नहीं तो, खुदा को तकलीफ होगी, वह नाराज हो जाएगा।
ईसा मसीह ने भी कहा “Be merciful” दयालु बनो। इसलिए किसी भी जीव की हत्या मत करो। किसी भी जानवर को मत काटो।
पाप का घड़ा बहुत बड़ा होता है इसीलिए जीवहत्या के पाप से बचो और जीवों पर दया करो
जानवरों को मारने वाले, लाने वाले, मांस पकाने वाले, परोसने वाले, खिलाने वाले, सबको बराबर पाप लगता है और पाप का घड़ा बहुत बड़ा होता है। पाप समुद्र में भी नहीं समाता है।इसीलिए आप पाप से बचो, जीवों पर दया करो। इस मानव मंदिर को जिसको जिस्मानी मस्जिद भी कहा गया, टेम्पल ऑफ लिविंग गॉड भी कहा गया, इसमें भगवान का निवास स्थान है, इसी में उसका दर्शन होता है इसीलिए इसमें मुर्दा मांस डाल कर इसको गंदा मत करो।
मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर, गुरुद्वारा में अगर कोई मुर्दा मांस डाल दे तो क्या वहां कोई ग्रंथ का पाठ करता है, कोई पूजा इबादत करता है? नहीं करता है। तो इस मानव मंदिर में आप गंदी चीजों को क्यों डाल रहे हो! तो आप इसको पाक साफ रखो।
इन गंदी चीजों को खाने से खून बेमेल हो जाता है और शरीर में बीमारियां आ जाती हैं इसीलिए बीमारी पैदा करने वाली चीजों को आप मत खाओ, नहीं तो आगे बहुत भयंकर समय आ रहा है, बड़ी-बड़ी बीमारियां आएंगी। उन बीमारियों से बचना है तो इस मानव मंदिर को साफ सुथरा रखो; इसके अंदर किसी भी पशु-पक्षी का मांस और अंडा मत डालना।
