गुरुद्वारा सुख सागर के अध्यक्ष चरणजीत सिंह कालरा ने बताया कि 11 एवं 12 सितंबर को श्री गुरु ग्रंथ साहिब के प्रथम प्रकाश को समर्पित दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा इसमें स्वर्ण मंदिर ,अमृतसर के हजूरी रागी भाई सरवन सिंह जी खालसा,, द्वारा शबद कीर्तन समागम किया जाएगा 11 सितंबर को कीर्तन भाई सरवन सिंह जी शाम को 7:00 बजे से लेकर 8:30 बजे तक शबद कीर्तन होगा एवं गुरु के अटूट लंगर का वितरणहोगा l
कालरा ने बताया कि 12 सितंबर को प्रातः 9:00 बजे अखंड पाठ की समाप्ति होगी l 9:30 बजे से 10:30 बजे तक सुखमणि साहिब का पाठ होगा l 10:30 से 12:00 तक इसके उपरांत हजूरी रागी दरबार साहिब अमृतसर द्वारा शबद कीर्तन किया जाएगा अरदास के उपरांत गुरु जी का अटूट लंगर का वितरण होगा l
सिख समाज के प्रवक्ता एस.एस.नारंग ने बताया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी सिख धर्म का पवित्र ग्रंथ है जिसको सिखों का जीवंत गुरु माना जाता है l इसका संकलन सिखों के पांचवे गुरु श्री गुरु अर्जन देव जी ने 1604 में किया था श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के 1430 पृष्ठ है l श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में गुरुओं के साथ-साथ संत कबीर, गुरु रविदास, बाबा फरीद और अन्य संतों की वाणी दर्ज है l इसमें स्कूल 36 संतों और गुरुओं की वाणी दर्ज है l गुरु ग्रंथ साहिब जी का मुख्य उद्देश्य जीवन की उपासना मानवता की सेवा और ईश्वर की उपासना करना है l इसमें प्रेरणा,
,करुणा और समानता का उपदेश दिया गया है l *श्री गुरु *ग्रंथ साहिब जी सिर्फ सिखों के ही नहीं बल्कि जगत गुरु हैl श्री गुरु गोविंद सिंह जी ने 1708 में ज्योति जोत सामने से पहले सिखों को बोला कि आज के बाद श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी आपके गुरु होंगे कोई देह-धारी गुरु नहीं होगा l
दलजीत सिंह गांधी ने बताया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब में वेर-विरोध को दुख का प्रमुख कारण बताया गया है जो मनुष्य किसी दूसरे का बुरा नहीं सोचता उसे कभी दुख-कलेश नहीं होता l गुरु जी के अनुसार ना कोई शत्रु है और सभी के साथ समान व्यवहार बनाना चाहिए, परमात्मा सदा भला करता है l वाणी ऐसी होना चाहिए की मनुष्य स्वयं भी शीतल हो और सुनने वाले को भी शांति एवं शीतलता प्रदान करें श्री गुरु रामदास जी ने परमात्मा की प्राप्ति के लिए क्षमा का गुण आवश्यक बताया है जो क्षमाशील है उनसे परमात्मा सदा पसंद रहता है
श्री गुरु अर्जन देव जी के अनुसार नाम भक्तों की पूंजी है गुरुदेव का संदेश है की क्षमा,आनंद ,सहजता ,विनम्रता के साथ भक्ति करना ही श्रेष्ठ है l
माधव कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ बी.एस.मक्कड़ ने बताया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब में संत कबीर,श्री गुरु रविदास, सधना जी, सेन जी ,संत नामदेव है l जयदेव संस्कृत के प्रकांड ज्ञाता,शेख फरीद ,महान सूफी कवि है स्वामी रामानंद का पद भी श्री गुरु ग्रंथ साहिब में संकलित है l वाणीयो को श्री गुरु ग्रंथ साहिब में वही स्थान दिया गया है जो गुरुओं की वाणी को मिलता है l इस ग्रंथ का मूल भाव मानव कल्याण है श्री गुरु ग्रंथ साहिब में भारतीय संगीत की दार्शनिक व्याख्या भी मिलती है,शास्त्रीय संगीत की पद्धतियां एवं उत्तर भारत में प्रचलित दोनों का सामंजस्य आध्यात्मिक वाणी को सर्वोच्च बनता है l
