सभी समाज जन द्वारा एवं गरीबों द्वारा गरीब परदेसी के नाम से प्रसिद्ध है
बाबा जी का संपूर्ण जीवन सेवा, सिमरन, विनम्रता और मानवता को समर्पित रहा। उनका पावन सान्निध्य, प्रेरणादायक उपदेश और आशीर्वाद सदैव हमारी स्मृतियों एवं हृदयों में जीवित रहेंगे।
इकबाल सिंह गांधी ने बताया कि 97 वर्षीय सरदार गुरदयाल सिंह जी परदेसी ने रेलवे ने अपनी सेवाएं प्रदान की एवं सेवानिवृत्ति के उपरांत समाज सेवा के काम में अपनी पूरी पेंशन राशि गरीबों में बांट देते थे कहा जाता है कि गरीब परदेसी रेलवे की सेवा में रहते हुए वह गरीबों का टिकट का पैसा खुद देते थे और अस्पताल में आए गरीब व्यक्तियों को ठंड के दिनों में चाय पिलाना और ऐसे गरीब जिनके पास गर्म वस्त्र नहीं है उन्हें अपने स्वयं की पेंशन दे देते थे l
चरणजीत सिंह कालरा ने बताया कि 30-35 वर्ष पूर्व गुरु नानक स्वास्थ्य सेवा की स्थापना कर कई आँखों की जांच एवं मोतिया बिंद आपरेशन के शिविर लगवाकर हजारों को रोशनी प्रदान की पश्चात सन 2001 से स्थानीय गुरुद्वारा फ्री गंज में प्रत्येक सप्ताह को गठिया (जोड़ों का दर्द), कमर दर्द, साइटिका एवं अन्य रोगों हेतु आयुर्वेद चिकित्सा शिविर का नियमित आयोजन हो रहा है जिसमें मालिश, भाप से सिकाई तथा उच्च कोटि की आयुर्वेदिक औषधियों द्वारा हजारों रोगी प्रति वर्ष लाभांवित हो रहे हैं l.
डॉ राम अरोड़ा ने बताया कि शिविर का अधिकांश खर्च अपनी पेंसन की राशि द्वारा करके उन्होंने असंख्य जरूरतमंद लोगों को स्वास्थ्य लाभ लेने का महान कार्य किया। उनके प्रयासों से न जाने कितने रोगियों को उपचार मिला, कितने परिवारों को आशा मिली और कितने लोगों के जीवन में मुस्कान लौटी। उनका जीवन हमें यह सिखाता है कि सच्ची पूजा मंदिरों और गुरुद्वारों तक सीमित नहीं होती, बल्कि पीड़ित और जरूरतमंद मानव की सेवा में निहित होती है। 97 वर्ष का उनका जीवन अनुभव, सादगी, विनम्रता और परोपकार से परिपूर्ण था। वे स्वयं प्रकाश बनकर दूसरों के जीवन में उजाला फैलाते रहे। ऐसे महान सेवाधर्मी व्यक्तित्व का जाना हम सभी के लिए अपूरणीय क्षति है, किन्तु उनके द्वारा बोए गए सेवा, प्रेम और मानवता के संस्कार सदैव जीवित रहेंगे।
डॉ बी.एस मक्कड़ ने बताया कि अपने विद्यार्थी जीवन के पश्चात आपने भारतीय रेल सेवा में कार्य किया। किन्तु आपकी वास्तविक पहचान एक कर्मयोगी समाजसेवी के रूप में रही। सेवा काल के दौरान तथा सेवानिवृत्ति के उपरांत भी आपने अपना संपूर्ण जीवन मानव सेवा, गुरमत प्रचार और समाज कल्याण के कार्यों को समर्पित रखा। आपने चिकित्सा शिविरों, लंगर सेवा, शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग, गुरुद्वारों में गुरमत प्रचार तथा बच्चों के लिए धार्मिक, सांस्कृतिक एवं प्रेरणादायक प्रतियोगिताओं के आयोजन के माध्यम से समाज को निरंतर दिशा प्रदान की। अपनी आजीविका से अर्जित आय का बड़ा भाग भी आपने सदैव जनकल्याण के कार्यों में समर्पित किया।
सिख समाज के प्रवक्ता एस एस नारंग ने बताया कि पिछले लगभग 25 वर्षों से आप गुरु नानक स्वास्थ्य केंद्र के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद रोगियों को प्रतिष्ठित चिकित्सकों द्वारा निःशुल्क चिकित्सा परामर्श, उपचार एवं दवाइयों की व्यवस्था कराते रहे। इसके साथ ही रोगियों एवं उनके परिजनों के लिए लंगर सेवा तथा आवागमन की सेवा भी आपके सतत प्रयासों से निरंतर संचालित होती रही। अनेक गंभीर रोगियों को आपने अपने व्यक्तिगत व्यय पर पंजाब एवं अन्य राज्यों के प्रमुख चिकित्सालयों तक पहुँचाकर उनके उपचार की व्यवस्था भी कराई, जिससे असंख्य परिवारों के जीवन में नई आशा का संचार हुआ।
एस एस नारंग ने बताया कि सरदार गुरदयाल सिंह जी ‘परदेसी’ का संपूर्ण जीवन ‘सरबत दा भला’, निःस्वार्थ सेवा, करुणा और मानवता का सजीव उदाहरण रहा। उनका सादा जीवन, विनम्र व्यक्तित्व और सेवा-भाव आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।
