अधिकमास के अंतिम दिन सोमवार को सोमवती अमावस्या का दुर्लभ महासंयोग है। इस विशेष अवसर पर उज्जैन में शिप्रा नदी के रामघाट, दत्त अखाड़ा घाट और सोमकुंड पर तड़के से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने स्नान, पूजन और तर्पण कर दान-पुण्य किया। अधिकमास के समापन के कारण इस बार सोमवती अमावस्या का धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ गया है।
अमृत सिद्धि योग में स्नान और पूजन
पंडित अमर डिब्बेवाला ने बताया कि इस बार सोमवती अमावस्या पर अमृत सिद्धि योग का विशेष संयोग बना है। सोमवार के दिन अमावस्या, मृगशिरा नक्षत्र और पुरुषोत्तम मास का समापन एक साथ होने से यह दिन बेहद पुण्यदायी माना जा रहा है। इस योग में किए गए धार्मिक कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है।
पितरों के निमित्त किए गए तर्पण और श्राद्ध
सोमवती अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने पितरों की शांति के लिए तर्पण और श्राद्ध कर्म किए। मान्यता है कि इस दिन पितरों के निमित्त किए गए दान, तर्पण और धार्मिक कार्यों से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। बड़ी संख्या में लोगों ने शिप्रा तट पर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
