Saturday, March 7, 2026
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शिप्रा नदी के शुद्धिकरण और उसके पुनर्जीवन के लिए सभी जाति और धर्म के लोगों को आगे आना होगा- शहर काज़ी.

उज्जैन , उज्जैन शहर का धार्मिक महत्व है जिसमें हजारों श्रद्धालु धार्मिक आस्था के तहत आते हैं. शहर वासियों का कर्तव्य है कि वह आने वाले श्रद्धालुओं के लिए शहर में धार्मिक वातावरण पैदा करें. शहर काज़ी खलिकुर्रहमान साहब ने उक्त वक्तव्य देते हुए कहा कि शिप्रा नदी के शुद्धिकरण के लिए गंदे नालों को उसने मिलने से रोकना होगा और शहर में मांस, मछली तथा अन्य पदार्थों का विक्रय शासन के बनाई हुई गाइडलाइन के अंतर्गत होना चाहिए. शहर में खान-पान की सभी वस्तुएं पूर्णतः स्वच्छ होना चाहिए.
अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेन्द्र चतुर्वेदी ने शहर काज़ी साहब को संस्था के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए सहयोग का अनुरोध किया.
त्रिशूल शिवगन वाहिनी के संस्थापक आदित्य नागर ने पतित पावनी शिप्रा को पुनर्जीवित करने और उसे प्रवाह मान बनाने के लिए बनाई जा रही योजना पर चर्चा की साथ ही शहर को स्वच्छ बनाने के लिए सभी धर्म गुरुओं के सहयोग के साथ ही जनता के सहयोग की भी आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि शहर में मांस एवं अन्य पदार्थों के विक्रेताओं से शासन द्वारा निर्धारित नीतियों को पालन करने का अनुरोध किया जावेगा और इनका सेवन करने वालों को मांस मदिरा का सेवन करने से परहेज कराने के लिए सामाजिक स्तर पर प्रयास किया जावेगा. नागर ने कहा कि मांस, मदिरा व अन्य धर्म निशिद्ध पदार्थो के विक्रय के लिए पवित्र नदी को ध्यान में रखते हुए स्थान चिन्हित करने की आवश्यकता है, ताकि  श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत न हो.
प्रतिनिधि मंडल द्वारा शहर काजी साहब को पुष्पमाला और दुपट्टा पहनाकर सम्मानित किया गया. इस अवसर पर व्यवसायी नासिर एहमद, रमेश रघुवंशी, जफर आलम अंसारी, कायस्थ समाज के अध्यक्ष दिनेश श्रीवास्तव, परशुराम सेना के प्रदेश मंत्री ऐश्वर्य नागर, आदि उपस्थित थे.

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