उज्जैन, मध्य प्रदेश परम् पूज्य परम् सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज ने दीपावली के दूसरे दिन 2026 के सतसंग में कहा कि मनुष्य शरीर में दूरबीन है जिससे घर में बैठ करके ही देवी-देवताओं और प्रभु का दर्शन हो सकता है, लेकिन वह कौन बताएगा? जब सतगुरु मिलते हैं तब वे बताते हैं।
इसीलिए सतगुरु हमेशा इस धरती पर रहे हैं, उनकी जरूरत सबको रहती है, उनके बगैर यह धरती कभी भी खाली नहीं रहती है। जीवात्मा के कल्याण का रास्ता बताने के लिए, प्रभु के दर्शन का भेद बताने के लिए, अपने घर पहुंचाने के लिए उस प्रभु ने इंतजाम कर रखा है। लेकिन कहा गया
“मुकुर मलिन अरु नयन बिहीना। राम रूप देखहिं किमि दीना”
जैसे अगर चुहिया की आंख टेस्ट करा दो और उसको बढ़िया पावरफुल चश्मा लगा दो तो क्या उसको भगवान नजर आएंगे? अरे! चश्मा लगा करके भी वह दीवार के किनारे-किनारे ही चलेगी।
यह जो लंबे मुंह की चुहिया होती है; छुछुंदर होती है जो दिन में देख नहीं पाती है, उसको चाहे कितने भी बढ़िया अस्पताल में ले जाओ और उसकी आंख टेस्ट करा करके चश्मा लगा दो तो क्या दिन में उसको दिखाई पड़ने लगेगा? नहीं लगेगा।
हनुमान जी ने जब भगवान राम के रूप को अंतर में देखा तब वे उनके भक्त बन गए थे
राम का बाहर का रूप अलग था और अंतर का अलग था। इन्हीं महापुरुषों ने अपना विराट रूप दिखाया। कृष्ण और राम कौन थे? वे मनुष्य शरीर में ही थे लेकिन इनके रूप को लोगों ने अंतर में देखा। हनुमान जी ने जब राम के रूप को अंतर में देखा तब वे उनके भक्त बन गए।
आज भी लोग कहते हैं कि “राम, हनुमान के हृदय में समाये हुए थे और उन्होंने फाड़ करके दिखाया था” जबकि उन्होंने फाड़ करके नहीं दिखाया था क्योंकि अगर शरीर को फाड़ दोगे तो क्या देख पाओगे? सब कट-फट जाएगा फिर भी कुछ नहीं मिलेगा। हनुमान जी ने अंतर में दिखाया था और इसीलिए गोस्वामी जी महाराज ने कहा,
“सुमिर पवन सुत पावन नामु, अपने वश कर राखेउ रामू”
वह ध्वन्यात्मक नाम जो सतगुरु से नामदान के समय मिलता है के जपने और उसके प्रभाव से उन्होंने अंतर में राम को देखा। जैसे गोस्वामी जी ने यह भी कहा,
“कोटिन चतुरानन गौरीसा”
कि करोड़ो ब्रह्मा, करोड़ो विष्णु, करोड़ो शंकर को नाम के प्रभाव से देखा।
