Saturday, September 5, 2026
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श्री गुरु गुरु ग्रंथ साहिब का प्रथम प्रकाश के उपलक्ष में. 2 दिवसीय कार्यक्रम 11 एवं 12 सितंबर को गुरुद्वारा सुख सागर मनाया जाएगा

सुखमनी साहिब श्री गुरु ग्रंथ साहिब में संकलित वाणी है

स्त्री सत्संग द्वारा सावन मास में चलाए जा रहे हैं 43 दिवसीय सुखमनी साहिबके पाठ की लड़ी की समाप्ति 12 सितंबर को

गुरुद्वारा सुख सागर के अध्यक्ष चरणजीत सिंह कालरा ने बताया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रथम प्रकाश के उपलक्ष में दो दिवसीय कार्यक्रम 11 एवं 12 सितंबर गुरुद्वारा सुख सागर मनाया जाएगा l उन्होंने कहा इस अवसर पर स्त्री सत्संग द्वारा सावन मास में चलाए जा रहे हैं 43 दिवसीय सुखमनी साहिब के पाठ की लड़ी की समाप्ति 12 सितंबर को होगी l दोनों दिन पाठ, गुरबाणी का शबद कीर्तन, का आयोजन किया गया है l यह उल्लेखनीय है कि 75 वर्षीय कुलदीप कौर सलूजा पिछले 40 वर्षों से प्रति वर्ष* सावन माह में सुखमनी साहिब का पाठ गुरुद्वारे में करती* है*l
सुखमनी साहिब श्री गुरु ग्रंथ साहिब में संकलित वाणी हैजिसकी रचना सिख पंथ के पंचम गुरु श्री गुरु अर्जन देव जी ने की उन्हें भक्ति और सृजन के संस्कार विरासत में मिले l सुखमनी साहिब में 24 श्लोको और 192 अर्स्टपदियों का अद्भुत रचनात्मक सौंदर्य है * l
सिख समाज के प्रवक्ता एस.एस.नारंग ने बताया कि सुखमनी साहिब की वाणी नाम स्मरण की महिमा के चित्रण से प्रारंभ होती है और नाम को सुख शांति का आधार अर्थात सुखमनी सिद्ध कर संपूर्ण होती है l वास्तव में मन के सुख तक पहुंचने की यह एक आध्यात्मिक यात्रा है l जैसे नर से नारायण बनने की अवधारणा है l ब्रह्मज्ञानी को ब्रह्मा अर्थात् परमात्मा का स्वरूप माना गया l
सुखमनी परमात्मा का नाम है जो अमृत है और जो सुख, प्रसन्नता,आनंद प्रदान करता है वह नाम संतों के हृदय में निवास करता है l

    सिख समाज के प्रवक्ता एस.एस.नारंग ने बताया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी,सर्वधर्म ,विश्व शांति का पैगाम एवं आध्यात्मिकता के शिखर है*l  यह विलक्षण शबद-गुरु संकलन,संयोजन ,चिंतन और भाषा आदि की दृष्टि से अभूतपूर्व है l श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन उपदेश किसी एक वर्ग ,धर्म विशेष के लिए ना होकर समूची  मानवता हेतु  है l *श्री गुरु ग्रंथ साहिब आध्यात्मिकता की सार्वभौमिक निधि है *इसमें 31 रागों  में गुरमत की मधुर झंकार है l   श्री गुरु ग्रंथ साहिब की प्रारंभता ही *एक ओंकार से *प्रारंभ होती है l अर्थात ईश्वर एक है*l
श्री गुरु ग्रंथ साहिब के कुल 1430 पृष्ठ या अंग है जिनमें 36 रचनाकारों की अमृतवाणी संग्रहित है रचनाकारों में सिख पंथ के  6 गुरुओं ,15 भक्तों , 11 ब्राह्मण भट्टो और 4 गुरु घर के सिखों की वाणी है l
 गुरुद्वारा सुख सागर के प्रबंधक दलजीत सिंह गांधी ने बताया कि दोनों कार्यक्रमों के उपरांत लंगर की व्यवस्था की गई है l 
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