भाेपाल, । ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज होने जा रही फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गुरुवार को ब्राह्मण समाज के विभिन्न संगठनों ने सड़कों पर उतरकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। डीबी मॉल के सामने एमपी नगर चौराहे पर हुए प्रदर्शन में बड़ी संख्या में समाज के लोग और बटुक भी शामिल हुए।प्रदर्शनकारियों ने फिल्म के शीर्षक और ट्रेलर में इस्तेमाल किए गए संवादों को लेकर कड़ा विरोध जताया और इसे ब्राह्मण समाज की छवि धूमिल करने का प्रयास बताया। इस दौरान निर्माताओं और कलाकारों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई।
टाइटल और विवादित डायलॉग पर आपत्ति
ब्राह्मण संगठनों का कहना है कि फिल्म के ट्रेलर में बोले गए संवाद — “ब्राह्मण लंगोट का ढीला होता है” — बेहद आपत्तिजनक और अपमानजनक हैं। संगठन का आरोप है कि इस तरह के शब्दों का प्रयोग जानबूझकर समाज को नीचा दिखाने के लिए किया गया है। अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज मध्य प्रदेश ने नेटफ्लिक्स इंडिया की डायरेक्टर रुचिका कपूर, फिल्म निर्माता नीरज पांडे और अभिनेता मनोज बाजपेयी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। प्रदर्शन के दौरान ‘मनोज बाजपेयी मुर्दाबाद’ जैसे नारे भी लगाए गए। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि फिल्म के शीर्षक और संवादों में बदलाव नहीं किया गया और फिल्म रिलीज की गई, तो पूरे देश में उग्र आंदोलन किया जाएगा।
समाज की छवि खराब करने का आरोप
अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज मध्य प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष पुष्पेंद्र मिश्र ने कहा कि फिल्म का नाम और उसके संवाद ब्राह्मण समाज को बदनाम करने वाले हैं। उन्होंने कहा कि फिल्मों को समाज का दर्पण माना जाता है, लेकिन मनोरंजन के नाम पर किसी विशेष समाज का अपमान करना पूरी तरह गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार फिल्मों और ओटीटी कंटेंट के जरिए ब्राह्मण समाज को नकारात्मक रूप में पेश किया जा रहा है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कोर्ट जाने की तैयारी
संगठन ने बताया कि इस मामले को लेकर कोर्ट में याचिका दायर की जा चुकी है और संबंधित कलाकारों, निर्देशक तथा ओटीटी प्लेटफॉर्म के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की जाएगी। एमपी नगर थाने को इस संबंध में ज्ञापन भी सौंपा गया है।
फिल्म का टीजर क्या दिखाता है
फिल्म के टीजर में अभिनेता मनोज बाजपेयी सीनियर इंस्पेक्टर अजय दीक्षित की भूमिका में नजर आ रहे हैं, जिन्हें ‘पंडित’ के नाम से जाना जाता है। उन्हें एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी के रूप में दिखाया गया है। टीजर के मुताबिक, दीक्षित 20 साल पहले एसआई के रूप में भर्ती हुए थे और भ्रष्टाचार के कारण कई बार डिमोशन झेल चुके हैं।
