Saturday, March 7, 2026
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रियासत की अदबी दुनिया में ‘सिलसिला ए अदब’  अपनी एक खास पहचान बना रहा है: सैफी सिरोंजी

भोपाल , महमूद ज़की फाउंडेशन और रोज़ाना नया नज़रिया की भोपालने  ख़िदमात काबिल तारीफ है। सिलसिला ए अदब  प्रोग्राम अपनी एक खास जगह बना रहा है। मैं इस काम के लिए डॉ. नज़र महमूद और उनकी टीम को बधाई देता हूं। ये विचार मशहूर लेखक और शायर सैफी सिरोंजी ने सिलसिला ए अदब प्रोग्राम की अध्यक्षता करते हुए कहे। रोज़ानामा नया नज़रिया के ऑफिस में हुए मासिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अल्लाह से दुआ है कि यह कार्यक्रम ऐसे ही चलता रहे। रोज़ाना नया नज़रिया और महमूद ज़की  वेलफेयर फ़ाउंडेशन के प्रोग्राम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल सीनियर सहाफ़ी  और रोज़नामा नदीम के एडिटर आरिफ अज़ीज़ ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि मैं महमूद ज़की साहब को तब से जानता हूँ जब उनके आर्टिकल रेगुलर तौर पर आफ़ताब-ए-जदीद में छपते थे। मैं खुशकिस्मत हूँ कि मुझे महमूद ज़की साहब से मिलने का भी मौका मिला। उसके बाद, मैंने उन पर आयोजित  एक नेशनल सेमिनार में भी हिस्सा लिया और उन पर लिखा अपना एक आर्टिकल पढ़ा। यह बहुत बड़ी बात है कि महमूद ज़की साहब ने अपने बच्चों को ऐसी परवरिश दी कि उनके काबिल बच्चों ने उनका नाम ज़िंदा रखा। ऐसा बहुत कम होता है कि बच्चे अपने माता-पिता के नाम और काम को आगे बढ़ाएँ। यह महमूद ज़की साहब की ट्रेनिंग ही है कि डॉ. नज़र महमूद और उनके भाई अपने पिता के नाम और काम को इतने ऑर्गनाइज़्ड तरीके से दुनिया तक पहुँचा रहे हैं। मैं दुआ करता हूँ कि अल्लाह सबको महमूद जकी की तरह  डॉ. नज़र महमूद जैसे बच्चे  दें। प्रोग्राम के दूसरे खास मेहमान, आपूर्ति सुपरस्टोर के मालिक इमरान मंसूर ने कहा कि ऐसे प्रोग्राम का हिस्सा बनना मेरे लिए एक नया अनुभव है। मैं खुद  खुशनसीब समझ रहा हूं के मुझे इस  प्रोग्राम में शामिल होने के लिए दावत दी। नया नज़रिया और महमूद ज़की वेलफेयर फाउंडेशन साहित्य की जो सेवा कर रहे हैं, वह न सिर्फ तारीफ़ के काबिल है, बल्कि उससे सिख कर हमको भी काम करना चाहिए है।

प्रोग्राम के आखिर में रोज़ाना नया नज़रिया के एडिटर और पब्लिशर और महमूद ज़की वेलफेयर फाउंडेशन के फाउंडर डॉ. नज़र महमूद ने मेहमानों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि आप सबने प्रोग्राम में शामिल होकर इसकी शान बढ़ाई है। इस प्रोग्राम की खास बात यह है कि इसमें जितने जाने-माने कवि और लेखक शामिल हैं, उतने अहम सुनने वाले भी हैं। यह प्रोग्राम मेरे पिता का लगाया हुआ पौधा है। यह सब उनकी मेहनत और कोशिशों का नतीजा है कि मुझे आप सबका प्यार मिल रहा है।

इस बार प्रोग्राम का संचालन डॉ. अहसान आज़मी ने बहुत अच्छे से किया। उन्होंने संचालक की ज़िम्मेदारी बहुत अच्छे से निभाई और हर कवि और लेखक को उनकी अहमियत और खासियत के हिसाब से बुलाया। उन्होंने प्रोग्राम की शुरुआत में महमूद ज़की फ़ाउंडेशन और रोज़ाना नया नज़रिया के इस मासिक प्रोग्राम के मकसद पर अपने खास अंदाज़ में रोशनी डाली। साथ ही, उन्होंने कहा कि रोज़ाना नया नज़रिया और महमूद ज़की वेलफ़ेयर फ़ाउंडेशन का मकसद नई पीढ़ी के सामने उर्दू की बेहतरीन चीज़ें पेश करना है। रोज़ाना नया नज़रीटा के एडिटर और पब्लिशर डॉ. नज़र महमूद एक ऐसे परिवार से हैं जो उर्दू भाषा और साहित्य का बहुत सम्मान करता है। उनके पिता महमूद ज़की अपने ज़माने के जाने-माने पत्रकारों में से एक थे। उन्होंने उज्जैन में एक दर्जन से ज़्यादा उर्दू अख़बारों को रिप्रेज़ेंट किया, वहीं उन्होंने हमारा समाज और दूसरे अख़बारों में एडिटर की ज़िम्मेदारी भी निभाई। इतना ही नहीं, उन्होंने कालिदास के संस्कृत साहित्य को जिस तरह से  उर्दू में तर्जुमा करने का काम किया है, वह उर्दू साहित्य में सुनहरे अक्षरों में लिखा गया है। यही कारण है कि उनकी रचनाएँ मध्य प्रदेश के स्नातक छात्रों के पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं और मध्य प्रदेश लेखक सिंघ द्वारा 2010 से, महमूद ज़की ग़ज़ल सम्मान भी प्रतिनिधि उर्दू कवियों को दिया जा रहा है। डॉ अहसान आज़मी ने नया नज़रिया के संपादक और प्रकाशक डॉ नज़र महमूद की पत्रकारिता  और दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों के साथ उनके पूर्व के कार्यों से भी श्रोताओं और कवियों को परिचित कराया।

 कार्यक्रम की शुरुआत में, डॉ नज़र महमूद ने मोतियों की माला और उपहारों के साथ अतिथियों का स्वागत किया। उनके साथ कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सैफी सिरोंजी का स्वागत प्रसिद्ध लेखक और कवि इकबाल मसूद ने किया। मुख्य अतिथि आरिफ अज़ीज़ और इमरान मंसूर, भोपाल के  कवि सरवत ज़ैदी, हिंदी कवि और वरिष्ठ पत्रकार पंकज पाठक का स्वागत डॉ नज़र महमूद ने किया इसके बाद, सीनियर शायर रकीब अंजुम का स्वागत काज़ी नावेद मलिक ने किया, युवा शायर अशफ़ाक अंसार का स्वागत मौलाना आज़ाद उर्दू यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर मुहम्मद हसन ने किया, युवा शायर फ़ाज़िल फ़ैज़ का स्वागत समीन-उल-ज़फ़र सिद्दीकी ने किया और हिंदी शॉर्ट स्टोरी राइटर चंद्रभान राही का स्वागत डॉ. आज़म ने किया। शॉर्ट स्टोरी राइटर चंद्रभान राही ने अपनी दो शॉर्ट स्टोरीज़ ‘मनत’ और ‘भविष्य तलाशती लड़की’ पढ़कर दर्शकों का मनोरंजन किया।  नया नज़रियाऔर महमूद ज़की वेलफेयर फ़ाउंडेशन के इस प्रोग्राम में उस्ताद शायर ज़फ़र सेहबाई, इक़बाल मसूद, अंजुम बराबांकवी, डॉ. आज़म, काज़ी नावेद मलिक, विजय तिवारी विजय, अलीम बज़्मी, अज़ीम असर, साजिद हसन, हसीब अंसारी, मुहम्मद गुफ़रान, अबरार ख़ान, नुसरत अली, डॉ. क़मर अली शाह, रिज़वान फ़ारूक़ी, मुहम्मद सलमान, फ़ैज़ान, इरशाद अली, मुहम्मद आज़म, मुहम्मद तौफ़ीक़, खलील ख़ान, शाद अहमद ख़ान और सैयद नमीर महमूद ने मौजूद रहकर महफ़िल की शान बढ़ाई।

सिलसिला ए अदब में शायरों की पेश की गई कविताएँ इस तरह थीं:
मैंने माना के हो गई शोहरत
मर गया मै तो खो गई शोहरत

सैफी सरवनजी

महफिल ए शर ओ अदब में बे हुनर कोई नहीं
कम नज़र आते हैं लेकिन कम नज़र की नहीं
 सरवत ज़ैदी

यह वही लाशों का शहर है
जहाँ पर दो माह बाद, एक कविता जन्म लेगी
क्योंकि मरे हुए लोगों के बीच,
कोई मरता नहीं

पंकज पाठक
 रास तो आई जिंदगी लेकिन
ऐसे बिछड़े के फिर मिले ही नहीं

रकीब अंजुम

हक राह पर चलूंगा मैं आहिस्ता और तुम
छू भी नहीं सकोगे मुझे दौड़ने के बाद

अशफाक अंसार

या तो दुनिया रहे या इश्क रहे
आशिकी हो तो आशिकी की तरह
 फ़ज़ील फैज़

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