उज्जैन, सिख समाज की स्त्री सत्संग की महिलाओं द्वारा प्रतिदिन किए जा रहे , 40 दिवसीय सुखमनी साहिब के पाठ के 9 वे दिन गुरुद्वारा सुख सागर मैं सामूहिक पाठ किया गया l स्त्री सत्संग की अध्यक्षा कुलदीप कौर सलूजा ने बताया कि सुखमनी साहिब में सिखों के पांचवें गुरु श्री गुरु अर्जन देव जी साहिब ने अपनी वाणी में कहा है कि सुख एक प्रकार की अनुभूति है ,प्राप्ति की नहीं l भावना की एक प्रकृति है, एक मानसिक स्थिति है l
सुख भीतर का विषय है ,बाहर का नहीं l सुख का स्त्रोत मनुष्य के भीतर है ,बाहर नहीं,l परमात्मा,निर्धन के लिए तेरा नाम ही धन है, निराश्रयों के लिए तेरा नाम आश्रय है ,निरादरो के लिए तेरा नाम ही आदर है l गुरुदेव ने संतों की सेवा की महिमा का चित्रण किया है साधु संतों की सेवा से दुख ,भय एवं अहम का निवारण होता है और मनुष्य चारों पुरुषार्थ का स्वामी बन जाता है l
सुखमनी साहिब में श्री गुरु अर्जन देव जी साहिब ने श्रेष्ठ मनुष्य के गुणों का चित्रण किया है कि श्रेष्ठ मनुष्य वह है जो अपने मन में सदा मित्रता ,भक्ति, विनम्रता का भाव रखता है और माया से कभी प्रभावित नहीं होता l जो मनुष्य सुख-दुख को समान भाव से समझता है वह पाप और पुण्य से कभी प्रभावित नहीं होता अर्थात ना तो वह किसी बुरे कार्यों के लिए आकर्षित होता है और ना पुण्य कार्य से प्रभावित होता है l सुखमनी साहिब में गुरुदेव का कथन है कि यदि कोई मनुष्य धर्म ,अर्थ ,काम, मोक्ष का स्वामी बनना चाहता है तो उसे साधु संतों की सेवा में मगन हो जाना चाहिए l मनुष्य सारे संसार का राजा होकर भी दुखी हो सकता है पर परमात्मा का नाम जप कर वह सुखी हो जाता है l जीवन में लाखों-करोड़ों कमा कर भी मनुष्य संतुष्ट नहीं होता है पर नाम का जप कर वह संसार-सागर से पार हो जाता है l
सुखमनी साहिब के सामूहिक पाठ एवं कीर्तन के उपरांत हरजीत कौर अरोड़ा द्वारा विश्व शांति के लिए अरदास की गई एवं प्रसाद का वितरण किया गया l
