उज्जैन। गुरु (व्यास) पूर्णिमा : अषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को ही गुरु व्यास पूर्णिमा कहते हैं, इस रात्रि में चन्द्रमा पृथ्वी के सर्वाधिक निकट होने से उसका व्यास बड़ा दिखाई देता है। विदेशों में इसे सुपर मून भी कहते हैं। अषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा को व्यास जी का जन्म हुआ था, इसलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहते हैं।
जगद्वन्द्यगुरुमहादेव, चरणानुरागी पंडित कैलाशपति नायक ने बताया कि श्री व्यासजी ने एक वेद से चार वेदों का (व्यास) विस्तार किया, इसलिए व्यासजी का नाम वेदव्यास हुआ। उनके द्वारा ही 18 महापुराण सहित, महाभारत ग्रंथ की रचना हुई। अत: व्यास जी की जन्म पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहा गया, क्योंकि सनातन वैदिक धर्म संस्कृति का सर्वोत्कृष्ट ज्ञान का प्रसार उन्हीं के द्वारा हुआ, जिनसे मनुष्य का अज्ञान दूर हो जाता है और ज्ञान-विज्ञान सहित धर्म की प्राप्ति के साथ आध्यात्म और भगवद् प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है। इसलिए भारत में भगवान भी अपने गुरु देव से ज्ञान प्राप्त करते हैं और गुरु की महिमा को सर्वोच्च स्थान पर प्रतिस्थापित करते हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम अपने गुरु वशिष्ठ-विश्वामित्र के अनुशासन में रहकर विद्याध्ययन करते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने भी उज्जैन में सांदीपनि गुरु जी के आश्रम में रहकर 64 विद्याओं का ज्ञान प्राप्त किया। यह भारतीय सनातन संस्कृति शिक्षा का इतिहास है, जो व्यास पूर्णिमा में गुरु पूर्णिमा के दर्शन का सुखद संयोग है।
