Saturday, March 7, 2026
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प्रमुख यूनियन की हड़ताल से पूरे भारत में बैंकिंग सेवाएं हो सकती हैं बाधित : बैंक ऑफ बड़ौदा

पब्लिक सर्विस सेक्टर जैसे बैंकिंग, इंश्योरेंस, पोस्टल और कंस्ट्रक्शन क्षेत्र में काम करने वाले 25 करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों ने बुधवार यानी 9 जुलाई को भारत बंद का आह्वान किया है।

इन क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारी राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर जाने वाले हैं। कर्मचारियों की इस हड़ताल से देश की कई सेवाएं बाधित हो सकती हैं। 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और उनके सहयोगियों के एक मंच हड़ताल को लेकर ऐलान किया है।

बैंक ऑफ बड़ौदा ने एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि बुधवार को पूरे भारत में बैंकिंग सेवाएं बाधित हो सकती हैं, क्योंकि प्रमुख बैंक यूनियनें राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल में शामिल होने की तैयारी कर रही हैं।

एक्सचेंज फाइलिंग में कहा गया है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ने चेतावनी दी है कि अगर हड़ताल होती है तो भले ही बैंक सामान्य परिचालन बनाए रखने का प्रयास कर रहा हो, इसकी शाखाओं और कार्यालयों के कामकाज पर असर पड़ सकता है। हड़ताल का नोटिस ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉईज एसोसिएशन (एआईबीईए), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (एआईबीओए) और बैंक एम्प्लॉई फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीईएफआई) के महासचिवों द्वारा दिया गया, जिन्होंने भारतीय बैंक संघ को सूचित किया कि उनके सदस्य विरोध प्रदर्शन में भाग लेंगे।

कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि हड़ताल का आह्वान करने वाली यूनियन सरकार की कॉर्पोरेट समर्थक नीतियों, हाल के श्रम कानून सुधारों और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों के निजीकरण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रही हैं।

श्रमिकों की मुख्य मांग है कि सरकार को बेरोजगारी दूर करने के लिए तत्काल कदम उठाने चाहिए। इन मांगों में रिक्त स्वीकृत पदों को भरने, अधिक रोजगार अवसर पैदा करने, मनरेगा कार्यदिवसों को बढ़ाने और वेतन वृद्धि बढ़ाने जैसी बातें शामिल हैं। ट्रेड यूनियन की मांग है कि शहरी क्षेत्रों के लिए भी मनरेगा जैसी योजना लाई जाए।

श्रमिकों की मांग है कि सरकार रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन (ईएलआई) योजना को भी संबोधित करे। यह हड़ताल पहले मई के लिए निर्धारित थी, लेकिन राष्ट्रीय घटनाओं के कारण इसे आगे के लिए पोस्टपोन कर दिया गया।

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