Saturday, March 7, 2026
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जिले भर के 3 हजार शिक्षक कर्मचारी मौन रैली निकालेंगे, ज्ञापन देंगे

उज्जैन, आज ई अटेंडेंस संघर्ष मोर्चा द्वारा आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से डिजिटल अटेंडेंस व्यवस्था (ई-अटेंडेंस) के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया गया। मोर्चा ने स्पष्ट किया कि यह प्रणाली कर्मचारी/शिक्षकों की गरिमा, व्यावसायिक स्वतंत्रता और कार्य की प्रकृति के खिलाफ है।

मोर्चा के पदाधिकारी जिला संयोजक श्री मनोहर गिरी, एवं अध्यक्षीय मंडल के ओपी यादव, डॉ. कैलाश बारोह, शेख मोहम्मद हनीफ, प्रेमप्रकाश पंड्या ने बताया कि अधिकारियों द्वारा शिक्षकों पर अनावश्यक निगरानी थोपने का प्रयास किया जा रहा है, जो शिक्षा व्यवस्था के मूलभूत ढांचे को प्रभावित करता है। शिक्षकों की भूमिका केवल उपस्थिति दर्ज करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

ई-अटेंडेंस प्रणाली शिक्षकों के शैक्षणिक कार्यों से ध्यान भटकाने वाली है।

कई ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी नेटवर्क और तकनीकी समस्याएं हैं, जिससे सही ढंग से उपस्थिति दर्ज कर पाना संभव नहीं है।

शिक्षकों पर निगरानी का यह तरीका अमानवीय हैं यह व्यवस्था उनके आत्म-सम्मान को ठेस पहुंचाती है।

ई अटेंडेंस संघर्ष मोर्चा ने मांग की है कि इस प्रणाली को तत्काल प्रभाव से स्थगित करने की मांग मुख्यमंत्री से की जा रही है।

हम, मध्य प्रदेश के लाखों शिक्षक, और कर्मचारी जो इस राज्य की बुनियाद को गढ़ने वाले कर्मयोगी हैं, आज एकजुट होकर आपके सम्मुख यह निवेदन करने को विवश हैं कि हम पर थोपे गए ई-अटेंडेंस सिस्टम ने शिक्षण जैसे गंभीर कार्य को एक “दैनिक उपस्थिति की जाँच” में बदल दिया है।

यह व्यवस्था न तो ज़मीनी सच्चाई से मेल खाती है, न ही शिक्षकों कर्मचारियों की गरिमा के अनुकूल है। जिन विद्यालयों में बिजली, नेटवर्क, संसाधन, और बुनियादी ढांचा तक नहीं है वहाँ डिजिटल अटेंडेंस की अनिवार्यता एक प्रकार से शिक्षकों को दंडित करने जैसा प्रतीत होता है।

मुख्य आपत्तियाँ एवं व्यावहारिक समस्याएँः

नेटवर्क और तकनीकी अव्यवस्थाः ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में आज भी सिग्नल नहीं आता। वहाँ ई-अटेंडेंस मात्र एक बोझ बन गया है। जबकि सभी कार्यालयों में उपस्थिति और मॉनीटरिंग की पर्याप्त व्यवस्था हैं।

संसाधनों का अभावः शिक्षक स्वयं के मोबाइल और डेटा से काम चलाने को मजबूर हो रहे हैं। क्या यह न्यायसंगत है?

शिक्षा से भटकावः शिक्षक का कार्य ‘पढ़ाना लिखाना’ है, न कि मोबाइल नेटवर्क से जूझना। ई-अटेंडेंस व्यवस्था निश्चित ही शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित करेगी।

मानवता की अवहेलना

किसी दिन नेटवर्क फेल हो जाए, मोबाइल गुम हो गया, खराब हो गया, चार्ज नहीं हो पाया, या शिक्षक/कर्मचारी किसी आपात स्थिति में हों, तो भी उसे अनुपस्थित मान लिया जाता है। उसे अपना पक्ष रखने तक का मौका नहीं दिया जाता हैं। यह प्रणाली पूरी तरह अमानवीय प्रतीत होती है। 5. शिक्षक वर्ग की गरिमा को ठेसः हमें अधिकारियों द्वारा “कर्तव्यविमुख” मानने की मानसिकता से शिक्षक समाज का मनोबल को टूट रहा है।

🎯 प्रमुख माँगें:

ई-अटेंडेंस को अनिवार्य के स्थान पर वैकल्पिक किया जाए जब तक सभी विद्यालयों/कार्यालयों में नेटवर्क, डिवाइस और संसाधनों की व्यवस्था न हो जाए।

इस प्रणाली को लागू करने से पहले शिक्षक/कर्मचारी संगठनों से विचार विमर्श कर व्यावहारिक समाधान निकाला जाए। उन्हें विश्वास में लिया जाये।

जहां अटेंडेंस आवश्यक हो, वहाँ सरकार द्वारा प्रमाणित उपकरण व नेटवर्क सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

शिक्षक / कर्मचारी शिक्षक/कर्मचारी समाज की यह सामूहिक आवाज़ है हम शिक्षा के क्षेत्र में इस नई तकनीक का विरोध नहीं करते, बल्कि स्वागत करते हैं, परंतु अधिकारियों द्वारा थोपे गए और अव्यवस्थित प्रयोगों से हम असहमत हैं।

7 जुलाई 2025 को शाम 4 बजे से कालिदास अकादमी कोठी रोड़ से जिले भर के 3 हजार शिक्षक कर्मचारी मौन रैली व हाथ में तख्तियां लेकर 5 बजे कोठी पैलेस पहुंचकर सीएम के नाम जिलाधीश महोदय को ज्ञापन दिया जायेगा।

मोर्चा ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई बहीं की गई तो वे प्रदेश स्तरीय चरणबद्ध आंदोलन करने को बाध्य होंगे।

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