श्रावण मास पवित्र मास है साथ ही चौमासा भी प्रारम्भ हो गया है इस कारण मास एवं मदिरा के सेवन करने वाले व्यक्ति इनके सेवन से परहेज करें । उक्त वक्तव्य त्रिशूल शिवगण वाहिनी के प्रतिनिधिमंडल से भेंट के दौरान महामण्डलेश्वर ज्ञानदास जी महाराज दादुराम अखाडा उज्जैन द्वारा देते हुए आम जन को समझाईश दी कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी चौमासे में गरिष्ठ पदार्थों को सेवन करने से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पडता है साथ ही कीटाणुओं का भी प्रकोप रहता है। उन्होंने कहा कि धार्मिक दृष्टि से भी किसी भी प्रकार की हिंसा या तामसिक प्रवृत्ति भगवान महाकाल की पवित्र नगरी में नहीं होना चाहिये ।
अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेन्द्र चतुर्वेदी ने सभी नागरिकों से अनुरोध कि वे पवित्र मास में धार्मिक नगरी की पवित्रता बनाये रखने में आपना योगदान दें और अन्य लोगों को भी धार्मिक प्रवृत्ति की ओर अग्रसर करने के लिए अपने स्तर से प्रयास करें ।
त्रिशूल शिवगण वाहिनी के संस्थापक एवं पूर्व अपर आयुक्त नगर निगम आदित्य नागर ने बताया कि संस्था का उद्देश्य पवित्र नगरियों में सात्विक आचरण एवं व्यवहार को आत्मसात करना भी है। उन्होंने कहा कि मास एवं मदिरा का सेवन अनेकों बीमारियों का जन्म होता है साथ ही आस पास से वातावरण को भी असहज और अप्रिय बनाता है। भगवान महाकाल की नगरी में श्रद्धालुओं और निवासियों को सभी व्यसनों से दूर रहना चाहिये। यह उनका प्रारब्ध है कि वे भगवान महाकाल की नगरी के रहवासी है और शहर की पवित्रता बनाये रखना उनका परम कर्तव्य है। श्री नागर ने शराब और मांस के विक्रेताओं से भी अपील की है कि वे भी सामग्री का श्रावण मास में विक्रय न करें और खुले में सामग्री न रखें।
इसके पूर्व त्रिशूल शिवगण वाहिनी के प्रतिनिधि मंडल द्वारा महामण्डलेश्वर श्री ज्ञानदास जी महाराज की चारधाम यात्रा सम्पन्न होने पर उनका पुष्पाहारों से स्वागत किया गया, प्रतिनिधि मण्डल में विशेष रुप से श्री जस्सु गुरु शर्मा सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
