Thursday, May 14, 2026
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जब महाप्रलय होने को होता है; तब सन्त अपने जीवों की अकाल मृत्यु नहीं होने देते हैं और उन्हें सतदेश में ले जाते हैं – बाबा उमाकान्त जी महाराज

उज्जैन, मध्य प्रदेश तीन दिवसीय बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के जीवन रक्षक भंडारे के प्रथम दिन प्रातः काल में हजारों की तादाद में पधारे भक्तों को सतसंग सुनाते हुए परम् पूज्य परम् सन्त बाबा उमाकान्त जी महाराज ने कहा कि जब महाप्रलय होने को होता है तब सन्तों के जीवों की सन्त अकाल मृत्यु नहीं होने देते हैं। सबसे पहले सन्त, अपने जीवों को अपने संग सतलोक में, सतदेश में ले जाते हैं, उस सतपुरुष के लोक में ले जाते हैं। सन्तों को यह मालूम हो जाता है कि अब महाप्रलय होने जा रहा है।
महाप्रलय में अनाज की कमी हो जाती है तो लोग पेड़ की पत्तियां खाते हैं। बरसात नहीं होती है और पेड़ की पत्तियां जब खत्म हो जाती है तब पेड़ की छाल खाने लग जाते हैं, जब छाल भी खत्म हो जाती है तब पेड़ों की जड़ खोद-खोद कर के खाने लग जाते हैं और जब वह भी नहीं मिलता है तब इन्सान, इन्सान को ही खाने लग जाता है।

यहां पर कोई भी चीज स्थाई नहीं है।

दुनिया का जो भी काम आप करते हो यह तो एक तरह से खेल है। जैसे बच्चे मिट्टी को इकठ्ठा करके घर बनाते हैं लेकिन कुछ समय बाद उसको मिटा देते हैं। ऐसे ही, जो कुछ भी काम आप कर रहे हो, इसको खुद नहीं मिटाओगे तो यह अपने आप मिट जाएगा। कुदरत मिटा देती है क्योंकि यहां पर कोई भी चीज स्थाई नहीं है।
कोई चीज अगर स्थाई है तो सिर्फ अपने घर में है। यह मिट्टी और पत्थर का घर जिसको आप अपना घर कहते हो, आपके पूर्वज भी यही कहते रहे लेकिन जब उनका शरीर छूट गया तब आपने ही उन्हें घर से बाहर कर दिया। इसीलिए यह आपका घर नहीं है।

दयाल लोक कौन-कौन से हैं?

परम् पिता जिसने सबको जन्म दिया, उसको आप बहुत से लोग नहीं जानते हो। उस परम् पिता को अलख, अगम, अनामी और सतपुरुष कहा गया। जितने भी जीव हैं सबकी रचना उन्हीं की मौज से हुई है। उस अनामी महाप्रभु का कोई नाम नहीं है। वहां अनामी धाम में कोई नाम ही नहीं है। वहां पर ना ही कोई स्थूल, लिंग, सूक्ष्म और कारण शरीर है, ना मृत्यु लोक ना पाताल लोक, ना गंगा-जमुना हैं। वहां पर तो नीचे के लोकों की कोई रचना नहीं है।
सतलोक, अलख लोक, अगम लोक और अनामी लोक, ये सब दयाल लोक कहलाते हैं। वहां काल का कोई नामो निशाँ नहीं है। काल किसको कहते हैं? काल उसको कहते हैं कि जब उसकी मौज दया की रहती है तब वह दया देता है और जैसे ही उसकी मौज या उसके बनाए गए नियम के अंतर्गत जब समय आता है तब वह उसको मिटा देता, सजा देता है।

देश विदेश से आए भक्त
बाबा जयगुरुदेव जी महाराज के भंडारे में बाबा उमाकांत जी महाराज का दर्शन करने,सतसंग सुनने और प्रसाद लेने के लिए एक तरफ भारत के हर राज्य से लाखों लोग का आगमन हो रहा है तो वही दुबई,अमरीक समेत अनेक देशों से भी भक्तगण उज्जैन आश्रम आए है। जहां सैकड़ों भंडारे, डेरे रावटी, शौचालय बनाए गए है।

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