उज्जैन, 52 हिंदू राजाओं को मुगल बादशाह जहाँगीर द्वारा ग्वालियर किले मैं बंदी बनाए गए राजाओं को रिहा कराया था गुरुद्वारा सुख सागर के अध्यक्ष चरणजीत सिंह कालरा ने बताया कि दीपावली के अगले दिन पर 21 अक्टूबर को सभी गुरुद्वारों और घरों में फूलों से सजावट और रोशनियों से जगमग जाएगा l प्रातः 7:00 ज्ञानी महल सिंह द्वारा पाठ किया जाएगा शब्द कीर्तन एवं अरदास की जाएगी और प्रसाद एवं मिठाई का वितरण होगा l
गुरुद्वारों में छठे सिख गुरु,श्री गुरु हरगोबिंद साहिब ने 52 हिंदू राजाओं को मुगल सम्राट जहाँगीर द्वारा बंदी बनाए गए ग्वालियर किले से रिहा कराया था । यह घटना 1619 में हुई थी, जब श्री गुरु हरगोबिंद को 52 राजाओं के साथ बंदी बनाया गया था l
संभागीय प्रवक्ता एस.एस.नारंग ने बताया यह उत्सव 400 साल से भी पहले की एक घटना की याद में मनाया जाता है जब श्री गुरु हरगोबिंद को 52 राजाओं के साथ ग्वालियर के एक किले बंदी बनाया गया था l जहाँ उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध बंदी बनाकर रखा गया था। जब बादशाह ने उन्हें रिहा करने का निर्णय किया तो गुरु जी ने कहा कि वह तब तक रिहा नहीं होंगे उनके साथ बंदी सभी 52 राजा भी मुक्त न हो जाएं l
बादशाह ने भी शर्त रखी कि गुरु जी अपनी चादर ,लबादा की लटकन पकड़ने वाले कैदी को रिहा कर सकते हैं। श्री गुरु जी ने अपनी बुद्धिमत्ता उपयोग करते हुए एक विशेष लबादा बनवाया, जिसकी 52 लटकनें थीं। उन 52 लटकनों को पकड़कर सभी राजा बाहर निकले जिससे सभी एक साथ ग्वालियर के एक किले से रिहा हो सके। यह दिन बंदी छोड़ दिवस (‘मुक्ति दिवस’ ) के रूप में मनाया जाता है जब गुरुजी जी अमृतसर पहुंचे तो संयोग से उसी दिन दिवाली थी। लोगों ने गुरु जी का स्वागत शहर को रोशन करके किया, जो दिवाली की खुशी में एक अतिरिक्त आनंद जुड़ गया l
गुरुद्वारा गुरु नानक घाट के प्रमुख बाबा त्रिलोचन सिंह जी सरपंच, इकबाल सिंह गांधी ,चरणजीत सिंह कालरा , पुरुषोत्तम सिंह चावला ,आत्मा सिंह विग, कुलदीप कौर सलूजा, नीलम कालरा ने बताया कि सभी समाज जन इस पावन पर्व को उत्सव के रूप में मनाएंगे एवं उन्होंने सभी समाज जन को दीपावली एवं बंदी छोड़ दिवस की बहुत-बहुत बधाई एवं शुभकामनाएं दी l
