उज्जैन ,आज दिनांक 20.09.2025 को पुलिस कंट्रोल रूम उज्जैन पर डीआईजी, उज्जैन रेंज नवनीत भसीन द्वारा *महिला संबंधी अपराधों के प्रकरणों में प्रथम सूचना रिपोर्ट में समुचित धाराओं का समावेश, विवेचना की कमियों तथा अभियोजन कार्यवाही के दौरान साक्ष्य एवं साक्षियों के परीक्षण में बरती गई लापरवाही के कारण न्यायालयों द्वारा पारित हो रहे दोषमुक्ति निर्णयों की समीक्षा हेतु एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
बैठक में डीआईजी महोदय द्वारा स्पष्ट रूप से कहा गया कि महिला संबंधी अपराध अत्यंत संवेदनशील होते हैं। इन प्रकरणों में लापरवाही अथवा अनदेखी समाज में पुलिस की छवि को प्रभावित करती है और पीड़ित पक्ष को न्याय से वंचित होना पड़ता है। अतः प्रत्येक अधिकारी एवं विवेचक को चाहिए कि – एफआईआर पंजीयन के समय सभी आवश्यक धाराओं का समुचित रूप से उल्लेख किया जाए।
अन्वेषण (Investigation) के दौरान साक्ष्य संकलन, घटनास्थल निरीक्षण, वैज्ञानिक/फॉरेंसिक प्रमाण एवं गवाहों के कथनों को विधि सम्मत दर्ज किया जाए।
अभियोजन कार्यवाही (Prosecution) में अभियोज अधिकारी से समन्वय स्थापित कर प्रकरण को मज़बूत बनाया जाए।
न्यायालय में गवाहों के परीक्षण के समय उनकी उपस्थिति व उचित मार्गदर्शन सुनिश्चित किया जाए।
प्रत्येक विवेचना अधिकारी अपने कार्य में सतर्कता बरते व किसी भी प्रकार की लापरवाही से बचें।
उक्त बैठक में एसडीओपी महिदपुर श्री जेन्डेन लिंगजरपा तथा उज्जैन जोन के सभी जिलों से आए पुलिस अधिकारी एवं पुलिसकर्मी उपस्थित रहे।
डीआईजी महोदय द्वारा यह भी निर्देश दिए गए कि समय-समय पर प्रकरणों की समीक्षा बैठकें आयोजित कर त्रुटियों का विश्लेषण किया जाए एवं दोषमुक्ति के कारणों को समझकर भविष्य में उनकी पुनरावृत्ति रोकी जाए।
अंत में, डीआईजी श्री नवनीत भसीन ने उपस्थित अधिकारियों को यह समझाइश दी कि –
“प्रत्येक विवेचना अधिकारी को यह ध्यान रखना होगा कि उनकी लापरवाही से कोई भी अपराधी न्यायालय से संदेह का लाभ पाकर दोषमुक्त न हो सके।”
