उज्जैन, । मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देश पर पूरे प्रदेश में कृष्ण जन्मोत्सव का भव्यता के साथ आयोजन हुआ, जिले में भी 14 से 18 अगस्त 2025 तक मध्यप्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण से सम्बन्धित स्थल एवं प्रदेश के प्रमुख मंदिरों व स्थानों के ऐतिहासिक-सांस्कृतिक महत्व को उजागर करते हुए मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग द्वारा बलराम जयंती (14 अगस्त 2025) एवं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी (16 अगस्त 2025) के पावन अवसर पर ”श्रीकृष्ण पर्व” हलधर महोत्सव एवं लीला पुरुषोत्तम का प्रकटोत्सव का आयोजन किया गया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की इसी श्रंखला में प्रदेश के संस्कृति विभाग एवं जिला प्रशासन उज्जैन के सहयोग से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से ओत-प्रोत श्रीकृष्ण पर्व का आयोजन उज्जैन के दो स्थानों – महर्षि सान्दीपनि आश्रम और नारायण धाम मंदिर प्रांगण, नारायण (उज्जैन) पर संयोजित किया गया ।
भगवान श्रीकृष्ण से संबंधित उक्त दोनों ही स्थानों पर 18 अगस्त की शाम सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का समापन हुआ । सांदीपनी आश्रम परिसर की अंतिम सांस्कृतिक संध्या में प्रारंभ श्री अविनाश धुर्वे एवं दल, बैतूल के कलाकारों द्वारा ठठ्या लोकनृत्य की प्रस्तुति से हुआ। पारंपरिक लोक वेशभूषा, ताल वाद्यों की लय और समूह नृत्य की सुंदर प्रस्तुति ने दर्शकों को मध्यप्रदेश की लोकसंस्कृति की झलक कराई। इसके पश्चात् श्री रामचन्द्र गांगोलिया, उज्जैन ने भावपूर्ण भक्ति गायन प्रस्तुत किया। उनके स्वर में भक्ति और करुणा की गहराई इतनी सशक्त थी कि अनेक श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूम उठे। समापन सत्र का मुख्य आकर्षण विशाला सांस्कृतिक संस्थान, उज्जैन द्वारा प्रस्तुत श्रीकृष्ण लीला रही। इस नाट्य प्रस्तुति में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन के प्रमुख प्रसंगों का प्रभावशाली मंचन किया गया। मंच पर प्रकाश, संगीत और अभिनय के समन्वय ने इसे अत्यंत मनमोहक और प्रभावशाली बना दिया।
वहीं नारायणा धाम मंदिर प्रांगण की प्रस्तुति में प्रथम सुश्री कल्याणी सुगंधी एवं वाणी साठे, उज्जैन के द्वारा द्वारा प्रस्तुत भक्ति गायन ने श्रोताओं को भक्ति रस से सराबोर कर दिया। दूसरी प्रस्तुति में मुम्बई से पधारी सुश्री सुकन्या नागदा एवं साथियों द्वारा श्रीकृष्ण केन्द्रित नृत्य – नाटिका का मंचन पारंपरिक कथक शैली में किया जिसे दर्शकों ने खूब सराहा । कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति में वृन्दावन के कलाकार श्री धरणीधर शर्मा एवं साथियों द्वारा श्रीकृष्ण लीला के अपने अंतिम दिवस के प्रसंगों को मंच पर प्रस्तुत किया ।
मध्यप्रदेश शासन, संस्कृति विभाग के इस प्रतिष्ठा आयोजन में दोनों ही स्थानों पर आयोजित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को स्थानीय दर्शकों / श्रद्धालुओं का भरपूर सहयोग प्राप्त हुआ जिसके चलते श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की यह आयोजन सुगमता से सम्पन्न हो सका ।
