सम्राट विक्रमादित्य के शासन में अवंतिका प्रदेश का विस्तार वर्तमान भारत से भी कहीं आगे था और आगे था इस क्षेत्र का समृद्ध व्यापार। उस समय विश्वभर के व्यापारी अवंतिका नगरी में व्यापार व्यवसाय के लिए आते थे। सम्राट विक्रमादित्य का मानना था कि जिस देश में व्यापार व्यवसाय अधिक होता है वह देश समृद्ध होता है। यही भावना के साथ प्रदेश में बीते डेढ़ वर्षों से देश-विदेश से निवेशकों ने व्यापार व्यवसाय के लिए कदम बढ़ाए हैं। प्रदेश में हो रही यह धनवर्षा मात्र प्रदेश में नहीं, बल्कि प्रदेश के जन-जन और घर-घर में धनवर्षा है। विश्वस्तर के व्यापारियों का प्रदेश में निवेश पूरे प्रदेश को समृद्ध बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है।
गत दिनों रतलाम में आयोजित किए गए रीजनल इंडस्ट्री स्किल एंड एम्प्लायमेंट कॉन्क्लेव में अलग-अलग क्षेत्रों में 30 हजार 402 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव दिए गए। किसी समय इतना निवेश प्रदेश के लिए अकल्पनीय लगता था। यह आज धरातल पर दिख रहा है ऐसा स्वरूप कभी साकार होगा। रतलाम कॉन्क्लेव से 35 हजार 520 लोगों के लिए रोजगार का मार्ग भी प्रशस्त हो गया। बेरोजगारी क्या होती है, इसकी परिभाषा कम से कम प्रदेश में तो भूल ही सकते हैं। प्रदेश मे डा. मोहन यादव के मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद से ही प्रदेश में व्यापार की गति को पवन वेग से अग्रसर कर दिया।
रतलाम में आयोजित कॉन्क्लेव में 16 कंपनियों ने व्यापार करने के लिए निवेश प्रस्ताव दिए। ऊर्जा, कृषि, पैकेजिंग, स्वास्थ्य, सोया, फैशन जैसे उद्योगों ने आमद दी। हजारों लोगों को रोजगार प्रदान करने और उत्पादन से क्षेत्र में मुद्रा का प्रवाह बढ़ेगा। एसआरएफ ने ही 9200 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव दिया। जबकि जेक्सन ग्रुप सर्वाधिक रोजगार प्रदान करने वाला उद्योग साबित होगा। एसआरएफ के निवेश से 7 हजार लोग और जेक्शन ग्रुप द्वारा किए जाने वाले 6 हजार करोड़ रुपये के निवेश से 7500 लोगों को रोजगार प्राप्त होगा। कॉन्क्लेव में आए कुल निवेश से रतलाम, मक्सी, शाजापुर, मोहासा बाबई, झाबुआ, धार, इंदौर, देवास, उज्जैन, आगर मालवा, कुक्षी, ग्वालियर, पीथमपुर, नीमच जैसे शहरों में धनवर्षा के योग बने और रोजगार के मार्ग प्रशस्त हुए। रतलाम वह शहर है, जहां प्रतिवर्ष दीपावली पर महालक्ष्मी मंदिर में व्यापारी लाखों की संपत्ति रखते हैं।
प्रदेश के कई शहरों का सड़क संपर्क अन्य प्रदेशों से भी जुड़ने से हर शहर में व्यापार के लिए पहुंच आसान हुई है। अमूमन 6 या 8 घंटों में ही एक बड़े शहर से दूसरे बड़े शहर तक पहुंच संभव हो सकी है। इसका कारण प्रदेश में कई जगह बन रहे फोर लेन, सिक्स लेन और 8 लेन एक्सप्रेस मार्ग हैं। प्रदेश में शीघ्र ही एयर कार्गो की सेवा शुरू होने से माल की आवाजाही भी और आसान हो जाएगी। इसका फायदा सभी बड़े-बड़े उद्योगों को मिलेगा, साथ ही संपर्क की गति भी तीव्र होगी।
सूरत से प्रदेश को मिले 15 हजार 710 करोड़ रु. का प्रस्ताव
रतलाम में आयोजित कॉन्क्लेव की यात्रा यहीं नहीं थमी। यह यात्रा विश्राम किए बिना ही गुजरात के सूरत में भी पहुंची। गुजरात के सूरत में डॉ. मोहन यादव वहां के उद्योगपतियों से मिले। सूरत से प्रदेश को 15 हजार 710 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले। इन उद्योगों से प्रदेश में 11 हजार 250 लोगों को रोजगार मिलेगा। 35,520 लोगों को रोजगार के योग तो रतलाम के कॉन्क्लेव से ही बन गए थे। इसके बाद सूरत से मिले निवेश के प्रस्ताव के कारण 11,250 लोगों को मिलने वाले रोजगार को मिलाकर 46,770 लोगों को बेरोजगारी से मुक्ति मिलेगी। यह आंकड़ा जादुई है। जादू भी कमाल का। किसी समय प्रदेश में लाखों लोग बेरोजगार थे। डॉ. मोहन यादव की उद्योगों को बढ़ाने की अभिलाषा, प्रदेश में व्यापार-व्यवसाय को समृद्ध करने की चाहत और प्रदेश के हर नागरिकों की आय में वृद्धि करने की सोच की ही परिणति है कि हमारा मध्यप्रदेश बीते कुछ महीनों से विकास की डगर पर तीव्र वेग से गतिमान हो चला है। विकास को जो नई गति मिली है, उसे अब थमने न देने की जिम्मेदारी हमारे प्रदेशवासियों की भी है। हमारे परिश्रम, तपस्या का ही फल हमारी आने वाली पीढ़ी को मिलेगा। चूंकि अभी तो यह शुरुआत है। सभी लगने वाले उद्योगों के फलने-फूलने के बाद विकास का साकार रूप अगले कुछ वर्षों में चमत्कारिक रूप से दिखाई देने लगेगा। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेशभर में उद्योग और कौशल विकास के कार्यक्रम शुरू हुए।
कुछ दिनों पहले पर्यटन के क्षेत्र में प्रदेश में बाहर से आने वाले पर्यटकों का आंकड़ा जारी हुआ था। यह आंकड़ा बीते एक वर्ष में 13 करोड़ से अधिक था। इतनी बड़ी संख्या में प्रदेश में पर्यटकों के आगमन से पर्यटन उद्योग को भी चार चांद लगे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा सभी उद्योगपतियों से वन-टू-वन चर्चा करना, उद्योगपतियों के मन के सभी समस्याओं का निराकरण और उद्योग स्थापित करने के लिए सभी सकारात्मक पक्षों को सामने रखना हमारे प्रदेश की उन्नति में सहायक बन रहे हैं। रतलाम में आयोजित किए गए कॉन्क्लेव में एमडी शक्ति पंप्स के दिनेश पाटीदार, जैक्शन ग्रुप के एमडी संदीप गुप्ता, ओरियाना पॉवर के कार्यकारी उपाध्यक्ष ओमकार पांडे, एसआरएफ के निदेशक प्रशांत मेहरा और बीबा फैशन के एमडी सिद्धार्थ बिन्द्रा ने मुख्यमंत्री से चर्चा की।
रतलाम को मिली और भी सौगात
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रतलाम दौरे के दौरान रतलाम के लिए और भी कई सौगातें प्रदान की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रतलाम में प्राचीन कालिकामाता मंदिर में कालिका माता लोक बनाया जाएगा। कालिका माता परिसर के विकास के लिए सैटेलाइट टाउन बनाया जाएगा। रतलाम में 4 ट्रैक की सौगात भी मुख्यमंत्री ने दी। प्रदेश में जीआइएस से अभी तक 30.77 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है। इसमें 21 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। 21 लाख लोगों के लिए रोजगार उपलब्ध कराने का कारनामा करना इतना आसान काम नहीं था। इतने लोगों को रोजगार प्रदान करने के लिए अच्छे-अच्छे लोगों को कई पापड़ बेलने पड़ जाते हैं।
बढ़ते उद्योग, व्यस्त होता प्रदेश और खुशहाल होते नागरिक
बीते कुछ महीनों में प्रदेश में उद्योगों की संख्या में निरंतर वृद्धि होती रही है। यह सकारात्मक भविष्य का उज्ज्वल संकेत है। कहते हैं आज पौधा लगा है तो आज ही फल नहीं मिलने वाला। पौधा फलेगा, पेड़ बनेगा और फिर जब फल और छांव देना शुरू करेगा तो हर किसी को तृप्त कर देगा। यही कहानी प्रदेश के विकास के साथ रची जा रही है। विकास की गाथा लिखने बैठेंगे तो शुरुआत तो वर्ष 2003 नवंबर महीने से मान सकते हैं। परंतु विकास को गति मिलने की बात कही जाए तो यह गति नवंबर 2023 से मिलना शुरू हो गई। प्रदेश की पुरानी पीढ़ी के लोग जानते हैं कि वर्ष 2003 में नवंबर के पूर्व पूरे प्रदेश को बीमारू, अंधेरा, गड्ढेदार सड़कों के रूप में पहचान मिली हुई थी। इसी कलुषित पहचान को बदलने का काम 2003 में नवंबर के बाद से शुरू हुआ। प्रदेश की पहचान बदल गई। तरक्की के पथ पर प्रदेश को शायद दौड़ लगाने की आवश्यकता भी महसूस की जा रही थी। इसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी समझा। वे उज्जैन से थे। सम्राट विक्रमादित्य की नगरी से। सम्राट विक्रमादित्य का शासन कैसा रहा इसकी जानकारी और इसका अध्ययन पहले ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव को था। उस काल में आखिर ऐसा क्या था, जो वह काल स्वर्णिम बना। वही सब कुछ वर्तमान में भी हासिल करना इतना आसान नहीं था, असंभव जैसा ही था। इस असंभव से लगने वाली जिम्मेदारी को मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने कंधों पर उठाया। आज प्रदेश में लगभग हर छोटे शहरों में उद्योग स्थापित हो रहे हैं। छोटे शहरों से भी युवाओं का पलायन रूकने लगा है। स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे शहर स्वयं तरक्की करने लगे हैं। प्रदेशभर में धन का प्रवाह बढ़ने से यहां के नागरिकों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आया है।
उद्योगपतियों ने बताई अपनी राय
झील एंटरप्राइजेस के फाउंडर दीनबंधु त्रिवेदी ने बताया कि झील ग्रुप ने 20 हजार युवाओं को प्रशिक्षण दिया है। इनमें से 10 हजार को झील ग्रुप की कंपनियों में नौकरी मिल चुकी है। बाकी प्रशिक्षित युवा स्वरोजगार या अन्य कंपनियों के साथ जुड़े हैं। मध्यप्रदेश और राजस्थान की यूनिट में महिलाओं को रोजगार मिला है। रतलाम में भी एक यूनिट लगाएंगे।
एप्का लेबोरेटरीज के एमडी अजीत जैन ने बताया कि मप्र में हमारा 2500 करोड़ का निवेश है। महाराष्ट्र के बाद एप्का ने 1983 में रतलाम में यूनिट डाली तब यहां सड़कों की हालत ठीक नहीं थी। प्रदेश को बीमारू राज्य समझा जाता था। वर्तमान सरकार और प्रशासन सक्रिय है। कानून व्यवस्था अच्छी है। तकनीकी में प्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। मप्र में 1000 करोड़ का और निवेश करेंगे।
एसआरएफ लिमिटेड के प्रेसिडेंट एंड सीईओ प्रशांत मेहरा ने बताया कि मप्र निवेश के लिए एक बेहतरीन प्रदेश है। सरकार के साथ मिलकर हम प्रदेश को एक ग्लोबल इन्वेस्टमेंट हब बनाएंगे। मप्र के रतलाम में हम 9.2 हजार करोड़ का निवेश करेंगे। इससे 4 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश में इंडस्ट्री फ्रैंडली वातावरण बना है। देश में 16 यूनिट हैं, इनमें से 5 मप्र में हैं।
अभी 30 साल पहले की चीन की स्थिति में
आने वाले समय में म. प्र. सबसे बड़े औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित होगा
रे पॉवर एक्सपर्ट प्राइवेट लिमिटेड कम्पनी के डायरेक्टर श्री राहुल गुप्ता और स्वास्तिका के श्री सुनिल न्याति मध्यप्रदेश कि निवेश पॉलिसी को देखकर रतलाम आए और रीज़नल कॉन्क्लेव में भाग लिया।
चर्चा के दौरान कम्पनी डायरेक्टर श्री राहुल गुप्ता ने बताया की मध्यप्रदेश शानदार पॉलिसी के साथ उद्योगपतियों को आकर्षित कर रहा है। अभी हमारा निवेश दक्षिण के राज्यों में है हम मध्यप्रदेश में ऊर्जा और एनर्जी स्टोरेज में काम करने के लिए इच्छुक है। मध्यप्रदेश आज ऐसा दिख रहा है की जैसा चीन 30 साल पहले था और औद्योगिकरण शुरु हुआ था। आने वाला भविष्य मध्यप्रदेश ही है।
