डॉ. देवेन्द्र जोशी के कविता संग्रह अंतस का उजाला का विमोचन संपन्न

उज्जैन। कविता कवि भोगा हुआ यथार्थ है जिसमें वह समाज की अनुभूतियों को समाहित करता है। जो कविता मानवीय संवेदनाओं को अभिव्यक्ति प्रदान करती है वे ही सामाजिक सरोकार की कसौटी पर खरी उतरती है। प्रखर कवि और लेखक डॉ. देवेन्द्र जोशी के नव प्रकाशित कविता संग्रह अंतस का उजाला का लोकार्पण करते हुए उक्त उद्गार अतिथि वक्ताओं ने व्यक्त किए। कार्यक्रम के प्रमुख अतिथि विक्रम विवि के कुलपति प्रो बालकृष्ण शर्मा थे। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार प्रमोद त्रिवेदी ने की। विशेष अतिथि  के रूप में विक्रम विवि के कुलानुशासक डॉ. शैलेन्द्र  कुमार शर्मा उपस्थित थे।

प्रमोद त्रिवेदी ने अपनी टिप्पणी  में कहा कि देवेन्द्र जोशी की कविताओं  में  सही जमीन और अनुकूल बीज के दर्शन होते हैं। अंतस का उजाला की कविताएं  जहां जीवन की विषमताओं  से जूझती है वहीं  मध्यवर्गीय स्वप्नों के लिए भी जगह निकालती है।इनमें  बौद्धिक घटाटोप है न मुद्राएं और न ही चातुर्य। यदि है तो सहज सरल भोलापन सादगी और विनम्रता से भरा। कृति का प्रकाशन निखिल प्रकाशन आगरा से हुआ है। सुधी लेखक और आलोचक प्रो. शैलेंद्रकुमार शर्मा ने कृति पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि कलमकार डॉ. देवेन्द्र जोशी के नए काव्य संग्रह अंतस का उजाला की कविताओं से गुजरना अपने समय और समाज के विविध पहलुओं से रूबरू होना है। वे अपने आसपास की विसंगतियों और विद्रूपताओं को महज एक तटस्थ और निस्संग द्रष्टा के रूप में नहीं देखते हैं। बदलाव के साथ गहरी मानवीय आस्था, प्रतिरोध के साथ उजास का विस्तार उनकी कविताओं को विशिष्ट बनाता है। कार्यक्रम  का संचालन और आभार प्रदर्शन सीमा जोशी ने किया।