ट्रांसपोर्टरों का आरोप- मध्य प्रदेश में जमकर हो रही वसूली

नयी दिल्ली,   ट्रक ऑपरेटरों ने आरोप लगाया है कि कोविड-19 संकट के बीच मध्य प्रदेश जैसे राज्यों की सीमाओं पर ट्रक चालको से जमकर वसूली की जा रही है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) ने इस बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हस्तक्षेप की अपील की है।

एआईएमटीसी ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि राज्यों की सीमाओं पर विशेषरूप से मध्य प्रदेश में उनसे प्रति वाहन 1,200 से 3,000 रुपये का ‘प्रवेश शुल्क’ वसूला जा रहा है। पत्र में कहा गया है कि यदि कोई ट्रक परिचालक प्रवेश शुल्क देने से मना करता है तो उसके वाहन को रोक लिया जाता है और एक या दूसरी वजह बताकर जुर्माना लगाया जाता है।

एआईएमटीसी ट्रांसपोर्टरों का शीर्ष संगठन है। करीब 95 लाख ट्रक मालिक इसके सदस्य हैं।

पत्र में कहा गया है कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद सीमाओं या अन्य स्थानों पर कोई क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) या कोई ‘चेकपोस्ट’ नहीं होना चाहिए जिससे परिवहन के वाहनों की सुगमता से आवाजाही सुनिश्चित हो सके।

पत्र में कहा गया है कि जीएसटी कानून का प्रमुख लक्ष्य शून्य भ्रष्टाचार है, जो पूरा नहीं हो पा रहा है। राज्यों की सीमाओं पर चेकपोस्ट या चौकियां लगातार काम कर रही है। इन पर चौकियां सिर्फ गरीब ट्रक परिचालकों से उगाही और उन्हें परेशान करने का काम होता है। यहां सिर्फ भ्रष्टाचार होता है।

पत्र में कहा गया है कि मध्य प्रदेश में सेंधावा, बरहनपुर, मुल्ताई, पिथोल, नयागांव, डोगरगांव, सोयात, हनुमान, चकघाट, मोरेना, नवगांव, जलगांव, बेहरमपुर, माछलपुर, जीरापुर, धोलपुल और छिंदवाड़ा की चौकियों पर ट्रक ऑपरेटरों को सबसे अधिक परेशान किया जाता है। इन चौकियों पर ट्रक वालों से प्रति वाहन 1,200 से 3,000 रुपये का प्रवेश शुल्क वसूला जा रहा है।