पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा से चंद्रदोष से मिलती है मुक्ति, जानें पूजा की विधि

माता के भक्तों का इंतजार खत्म हो चुका है। नवरात्रि का त्योहार आज यानी 17 अक्टूबर 2020 से शुरू हो चुका है। नवरात्रि का पहला दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप का होता है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री पुकारा जाता है। मां दुर्गा का यह स्वरूप बेहद शांत, सौम्य और प्रभावशाली है। कलश स्थापना के साथ ही मां शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा की जाती है।

कलश स्थापना का मुहूर्त (17 अक्टूबर 2020 शनिवार)

शुभ समय – सुबह 6:27 से 10:13 तक (विद्यार्थियों के लिए शुभ)
अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 11:44 से 12:29 तक (सर्वजन)
स्थिर लग्न (वृश्चिक)- प्रात: 8.45 से 11 बजे तक (शुभ चौघड़िया, व्यापारियों के लिए श्रेष्ठ)

मां शैलपुत्री की सवारी नंदी माने जाते हैं। मां शैलपुत्री के माथे पर अर्ध चंद्र स्थापित है। मां के दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं में कमल है। देवी सती ने पर्वतराज हिमालय के घर पुर्नजन्म लिया और वह फिर वह शैलपुत्री कहलाईं। ऐसी मान्यताएं हैं कि मां शैलपुत्री की पूजा करने से चंद्र दोष से मुक्ति मिलती है।

मां शैलपुत्री की पूजा की विधि

नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा में सभी नदियों, तीर्थों और दिशाओं का आह्वान किया जाता है। नीचे दिए गए मंत्रों के उच्चारण करने से मां शैलपुत्री प्रसन्न होंगी।

या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।
या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।

ऐसी मान्यताएं हैं कि मां शैलपुत्री को सफेद वस्तुएं बेहद प्रिय हैं। इसलिए नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री स्वरूप को सफेद मिष्ठान का भोग लगाने की मान्यता है। इसके साथ ही उन्हें श्वेत पुष्प अर्पित करना भी बेहद लाभदायक होता है।