ममता जीत सकती हैं बंगाल, जबकि धारणा की लड़ाई में भाजपा आगे : जनमत सर्वेक्षण

नई दिल्ली,  । आईएएनएस सी-वोटर ओपिनियन वेव 2 के अनुसार, धारणा की लड़ाई में पिछड़ने के बावजूद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस पार्टी पश्चिम बंगाल में अपना परचम लहरा सकती है। सर्वे के अनुसार, द्रमुक-कांग्रेस तमिलनाडु में परचम लहरा रही है, जबकि वामपंथी केरल पर कब्जा बनाए हुए हैं। भाजपा असम में बरकरार है तो पुडुचेरी में एआईएनआरसी-भाजपा गठबंधन को विजयी होने की उम्मीद है।

सर्वे में एक महत्वपूर्ण अवलोकन यह है कि पश्चिम बंगाल में इरादों की दृष्टि से वास्तविक मतदान की संख्या और जीत की धारणा के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर है।

सर्वे के अनुसार, जहां भाजपा धारणा और जीत की जंग में सबसे आगे है, वहीं तृणमूल भी संभावित मतदाताओं के समीकरण का नेतृत्व कर रही है।

सर्वेक्षण में 5 राज्यों में 824 सीटों के लिए 70,608 से अधिक लोगों की रायशुमारी की गई। इसमें त्रुटि की संभावना 3-5 प्रतिशत है।

जहां तक वास्तविक मतदान और जीतने की धारणा का संबंध है तो तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में कोई विरोधाभास नहीं है। दरअसल, इन सभी राज्यों में वास्तविक वोट शेयर में अग्रणी पार्टी के लिए जीत की धारणा आगे बढ़ती है, जो सर्वे द्वारा रिपोर्ट की गई प्रवृत्ति की पुष्टि करती है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल को 294 की विधानसभा में 156 सीट मिलने का अनुमान है और इसे साधारण बहुमत प्राप्त हो सकता है। तृणमूल हालांकि अपना वोट प्रतिशत बरकरार रख सकता है, लेकिन इसमें 2.1 प्रतिशत की कमी आ सकती है। भाजपा 27.8 प्रतिशत के वोट शेयर स्विंग के साथ 38 प्रतिशत वोट शेयर प्राप्त कर सकती है। उसे 100 सीटें मिलेंगी जबकि वाम-कांग्रेस गठबंधन को 35 सीटें मिलने का अनुमान है।

तमिलनाडु में यह द्रमुक के नेतृत्व वाला गठबंधन है, जो कांग्रेस के गठबंधन के साथ दो तिहाई बहुमत की ओर अग्रसर है और अन्य को 234 में से 158 सीटें जीतने का अनुमान है, जबकि सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक, भाजपा और अन्य को केवल 62 सीटें मिलेंगी । यूपीए गठबंधन केवल 2 प्रतिशत वोट शेयर हासिल कर रहा है, लेकिन एआईएडीएमके 15 प्रतिशत वोट शेयर के भारी नुकसान के साथ हार रही है।

केरल में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा 2016 के अपने प्रदर्शन को दोहरा रहा है और पिछले चुनाव में 91 की तुलना में 87 सीटों की संख्या के साथ फिर से सरकार बनाएगा। जबकि एलडीएफ 3.4 प्रतिशत वोट शेयर खो रहा है, कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ 6.2 प्रतिशत के साथ अधिक वोट खो रहा है और यहां तक कि भाजपा वोट शेयर खो रही है, जबकि अन्य हासिल कर रहे हैं। यूडीएफ को 140 के सदन में 51 सीटें जीतने का अनुमान है।

असम में, भाजपा के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल दूसरे कार्यकाल में भी बने रहेंगे और 2016 के प्रदर्शन को दोहराते हुए 72 सीटें हासिल कर सकते हैं। हालांकि यह पिछले के मुकाबले 2 सीटें कम हैं। कांग्रेस को 47 सीटों पर जीत मिल सकती है। कांग्रेस का वोट प्रतिशत भी बढ़ सकता है, हालांकि कम सीटें जीतने का अनुमान है। इसका वोट शेयर लगभग 10 प्रतिशत बढ़ सकता है और भाजपा के वोट प्रतिशत से तुलना करने पर इसमें केवल दो प्रतिशत का अंतर रह सकता है।

पुडुचेरी में कांग्रेस सरकार विधानसभा में वोट हार गई, लेकिन यह विधानसभा चुनाव में भी पराजय का मुंह देख सकती है। एआईएनआरसी-भाजपा-एआईडीएमके गठबंधन 30 सदस्यों वाले सदन में 19 सीटों के साथ बड़ी जीत हासिल कर रहा है।