हसीना ने यूएनजीए से कहा, कोविड-19 वैक्सीन वैश्विक सार्वजनिक उत्पाद

ढाका,   बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को याद दिलाया है कि कोविड-19 महामारी के बीच दुनियाभर में लोगों के भाग्य आपस में जुड़े हुए हैं, ऐसे में उन्होंने विश्व नेताओं से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा कि किसी भी प्रमाणित वैक्सीन को एक ही समय में सभी के लिए सुलभ बनाया जाए।

बीडी न्यूज 24 की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने यह टिप्पणी शनिवार को वीडियो लिंक के माध्यम से 75वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा के अपने संबोधन के दौरान की।

 

जल्द ही एक वैक्सीन की उपलब्धता के प्रति आशा व्यक्त करते हुए हसीना ने कहा, “वैक्सीन को वैश्विक सार्वजनिक उत्पाद मानना बेहद जरूरी है। हमें एक ही समय में सभी देशों को इस वैक्सीन की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने की जरूरत है।”

उन्होंने कहा, “अगर तकनीकी जानकारी और पेटेंट दिया जाए तो बांग्लादेश के फार्मास्युटिकल उद्योग में वैक्सीन का बड़े पैमाने पर उत्पादन करने की क्षमता है।”

महामारी को एक ‘असाधारण संकट’ बताते हुए, हसीना ने स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और लोक सेवकों सहित सभी अग्रणी योद्धाओं, जो प्रभावित देशों और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं, उन्हें सम्मान दिया।

 

उन्होंने संयुक्त राष्ट्र निकाय में निहित बहुपक्षवाद के रूप में बांग्लादेश की ‘अधूरी प्रतिबद्धता’ की बात भी दोहराई।

बीडीन्यूज 24 ने प्रधानमंत्री हसीना के बयान का हवाले से कहा, “महामारी ने वास्तव में मौजूदा वैश्विक चुनौतियों को बढ़ा दिया है। इसने बहुपक्षवाद की अनिवार्यता को भी बढ़ा दिया है।”

संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में पहली बार डिजिटल प्लेटफॉर्म पर असेंबली होने के साथ हसीना ने जनरल असेंबली हॉल की अपनी निजी यादों को भी दर्शाया।

उन्होंने कहा, “यह महासभा हॉल मुझमें गहरी भावनाओं को जागृत करता है। साल 1974 में इसी हॉल से मेरे पिता बंगबंधु शेख मुजीबुर रहमान ने पहली बार एक नए स्वतंत्र देश की सरकार के प्रमुख के रूप में बांग्ला में भाषण दिया था।”

हसीना ने अपने संबोधन में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से रोहिंग्या संकट के समाधान के प्रयासों को आगे बढ़ाने का भी आग्रह किया।

उन्होंने कहा, “बांग्लादेश ने म्यांमार से जबरन भगाए गए 11 लाख से अधिक नागरिकों को अस्थायी आश्रय दिया है। इसे तीन साल से अधिक समय हो चुका है।”

उन्होंने आगे कहा, “अफसोसनाक है कि एक भी रोहिंग्या को वापस नहीं भेजा जा सका। समस्या म्यांमार द्वारा बनाई गई थी और इसका समाधान म्यांमार को ही करना चाहिए। मैं अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अनुरोध करती हूं कि वह संकट के समाधान के लिए अधिक प्रभावी भूमिका निभाए।”