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आत्म-विकास का अवसर है चातुर्मास

भारतीय धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा में चातुर्मास का विशेष महत्व है। विशेषकर वर्षाकालीन चातुर्मास का। हमारे यहां मुख्य रूप से तीन ऋतुएँ होती [...]

स्वामी विवेकानन्द थे भारतीयता की संजीवनी बूंटी

महापुरुषों की कीर्ति किसी एक युग तक सीमित नहीं रहती। उनका मानवहितकारी चिन्तन एवं कर्म कालजयी होता है और युगों-युगों तक समाज का [...]

सबकी जुबां पर बस एक ही बात ‘सु-शांत’ आखिर ऐसा क्यों किया ?

सुशांत तुम्हारे चले जाने की जैसे मनहूस खबर आयी, मुझे गुजरे कल की बातें याद आने लगी। तुमसे हुई चंद मुलाकातोंकी हंसती तस्वीरों [...]