सैनिक की पत्नी की याचिका पर उच्च न्यायालय ने मांगा जवाब

इलाहाबाद, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने केंद्र और सेना से कहा है कि वे ‘आक्रामक व्यवहार’ के चलते सैन्य अस्पताल में भेजे गए जवान की पत्नी की ओर से दायर याचिका पर अपने जवाब दायर करें। जवान को अस्पताल भेजे जाने से कुछ ही दिन पहले उसने सोशल मीडिया पर एक वीडियो अपलोड कर शिकायत की थी कि छोटे रैंक के कर्मियों को कथित तौर पर तुच्छ काम करने पड़ते हैं।

न्यायमूर्ति अरूण टंडन और न्यायमूर्ति राजुल भार्गव ने कल रिचा सिंह की याचिका पर यह आदेश जारी किया। रिचा के पति लांस नायक यज्ञ प्रताप सिंह को पिछले माह बरेली के सैन्य अस्पताल भेज दिया गया था।

मध्यप्रदेश के रीवा जिले से आने वाली रिचा ने आरोप लगाया है कि उनके पति को ‘‘गलत व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाने की वजह से वरिष्ठ अधिकारी प्रताड़ित कर रहे हैं।’’ अपने पति के ‘‘मानसिक रूप से स्वस्थ’’ होने का दावा करते हुए रिचा ने मांग की है कि उन्हें अस्पताल से छुट्टी देने के निर्देश दिए जाएं और लांस नायक की ओर से ‘सहायक’ व्यवस्था के दुरूपयोग के संबंध में लगाए गए आरोपों की जांच के आदेश दिए जाएं।

वीडियो में, लांस नायक ने आरोप लगाया था कि ‘सहायक’ के रूप में तैनात जवानों से अधिकारियों के कपड़े धुलवाए जाते हैं और जूते पॉलिश करवाए जाते हैं।

इस साल 15 जनवरी को सेना दिवस के अवसर पर आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए जनरल बिपिन रावत ने चेतावनी दी थी कि अपनी परेशानियों को बताने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 14 फरवरी को रखी है।