सुलेमानी पर हमला और रक्तपात रोकने के लिए किया गया: अमेरिका

वाशिंगटन,  अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट ओ’ ब्रायन ने कहा है कि ईरान के शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर जनरल कासिम सुलेमानी को मारने का राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का निर्णय रक्षात्मक था और इसे भविष्य में रक्तपात रोकने के लिए लिया गया था।

ओ’ ब्रायन ने आरोप लगाया, ‘‘पश्चिम एशिया के देशों में यात्रा कर रहा सुलेमानी दमिश्क से इराक आया था, जहां वह अमेरिकी जवानों और राजनयिकों पर हमले का षड्यंत्र रच रहा था।’’

ओ’ब्रायन ने जनरल के मारे जाने पर टिप्पणी करते हुए कहा, ‘‘यह और रक्तपात रोकने के लिए की गयी रक्षात्मक कार्रवाई थी।’’

ट्रम्प ने बयान दिया था कि यह कार्रवाई युद्ध शुरू करने के लिए नहीं, बल्कि युद्ध रोकने के लिए की गई थी।

ओ’ब्रायन ने ट्रम्प के इसी बयान का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘इस हमले का लक्ष्य उन हमलों को रोकना था जिनका षड्यंत्र सुलेमानी रच रहा था। इसका लक्ष्य भविष्य में अमेरिकियों के खिलाफ ईरान के परोक्ष या आईआरजीसी कुद्स बल के जरिए किए जाने वाले प्रत्यक्ष हमले को रोकना था।’’

उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ तौर पर कहा है कि उन्होंने ईरान के साथ बिना शर्त वार्ता का प्रस्ताव रखा था। वह ईरान के साथ शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं। दुर्भाग्य से, राष्ट्रपति के ये प्रयास खारिज कर दिए गए।’’

उन्होंने आरोप लगाया कि सुलेमानी का अमेरिकियों पर हमले करने का लंबा इतिहास रहा है। उन्होंने सुलेमानी पर ‘‘असद के शासन और सीरिया में उसके नृशंस प्रयासों’’ का समर्थन करने का भी आरोप लगाया।

ओ’ब्रायन ने कहा कि ट्रम्प प्रशासन ने यह साफ कर दिया है कि यदि ईरान बदले की कार्रवाई करता है या तनाव को बढ़ाता है तो यह बहुत खराब फैसला होगा।

उल्लेखनीय है कि जनरल सुलेमानी ईरान के अल-कुद्स बल के प्रमुख थे। शुक्रवार को बगदाद अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा से रवाना हुए उनके काफिले पर किए गए अमेरिकी ड्रोन हमले में वह मारे गए। हमले में ईरान के शक्तिशाली हशद अल-शाबी अर्द्धसैनिक बल के उप प्रमुख की भी मौत हो गई थी।

इसके एक दिन बाद शनिवार तड़के अमेरिका ने एक ताजा हवाई हमले में इराक के हशद अल शाबी अर्द्धसैन्य बल के सदस्यों को निशाना बनाया।