संपूर्ण भारत की शिक्षा गुरुकुल शिक्षा ही होगी : श्रीमती अरुणा सारस्वत

उज्जैन। संपूर्ण भारत की शिक्षा गुरुकुल शिक्षा ही होगी। वर्तमान में संचालित गुरुकुलों में वेद वेदांग की शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा का समन्वय भी होना चाहिए।

यह बात कुमावत धर्मशाला में भारतीय शिक्षा मंडल गुरुकुल प्रकल्प के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम गुरुकुलों का विस्तार एवं दशा दिशा विषय पर मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित भारतीय शिक्षण मंडल की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्रीमती अरुणा सारस्वत ने कही। उपस्थित जनसमुदाय विद्यार्थी गृह गुरुकुलों के शिक्षक विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बताया कि पूर्व में जो गुरुकुल संचालित हुआ करते थे वह समाज आधारित थे तथा आज भी गुरुकुलों का संचालन सरकार आदि के भरोसे ना चलाकर समाज के स्रोतों से पालन-पोषण होना चाहिए, जिससे भारतीय वैदिक तथा आधुनिक शिक्षा आत्मनिर्भर हो। हमारी राष्ट्रीय तरुण शक्ति संपूर्ण भारत में अपनी वैदिक सनातनी शिक्षा का लोहा मनवा सके। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. सदानंद त्रिपाठी ने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान समय में गुरुकुल शिक्षा का सृजन पोषण करना बहुत कठिन कार्य है, जो संस्थाएं गुरुकुल का संचालन कर रही है। वह सम्मान बधाई के पात्र हैं। गुरुकुलों में सदा से संस्कार एक मनुष्य निर्माण का कार्य होता आया है, जो संस्कारित होकर समाज को सही दिशा में ले जाने का कार्य तथा उसका पालन पोषण करता है। कार्यक्रम के संयोजक गुरुकुल प्रांत सह प्रमुख रामचंद्र नायक द्वारा संगठन गीत प्रस्तुत कर किया गया। सरस्वती पूजन माल्यार्पण के साथ गौरी नायक द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुति दी गई। पश्चात श्रीमती मंजू, श्रीमती कल्पना नायक, पंडित हरि गुरु दुबे, अंबर दुबे, संजय उपाध्याय, पंडित मुकेश मेहता द्वारा अतिथियों का स्वागत किया गया। कार्यक्रम में संगठन का परिचय विक्रम विश्वविद्यालय समाज शास्त्र की विभागाध्यक्ष डॉक्टर ज्योति उपाध्याय प्रांत अध्यक्ष द्वारा दिया गया। कार्यक्रम का आभार प्रदर्शन पंडित विजय जोशी ने माना।