रॉफेल मुद्दे पर फिर बेपरदा हुई कांग्रेस

पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से मुद्दा बनाए गए रॉफेल मामले पर एक बार फिर से कांग्रेस के नीचे से जमीन निकल गई है। हालांकि पूर्व में इस बारे में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी का बयान झूठा साबित होने के बाद माफी भी मांगी थी, लेकिन बाद में भी उन्होंने रॉफेल के बारे में झूठी बातें कहीं थी। वर्तमान में कांग्रेस की वास्तविकता यही है कि वह हर मामले में अपने ही बुने जाल में फंस जाती है। चाहे वह पुलवामा का हमला हो या फिर धारा 370 का ही मामला हो। सभी मामलों में कांग्रेस का दांव उलटा ही पड़ रहा है। कांग्रेस के पतन का कारण भी यही माना जा रहा है। चूंकि अब सर्वोच्च न्यायालय ने रॉफेल सौदे के मामले में कहा था कि इसमें पूरी तरह से पारदर्शिता अपनाई गई है, इसलिए किसी भी प्रकार की जांच की आवश्यकता नहीं है। यह निर्णय वास्तव में केन्द्र सरकार प्रक्रिया पर सही की मुहर ही लगती है।

सुरेश हिन्दुस्थानी

रॉफेल मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान ही राहुल गांधी के बयान को झूठा सिद्ध कर दिया। सर्वोच्च न्यायालय ने इस बारे में पुनर्विचार याचिका को अस्वीकार करते हुए कहा कि रॉफेल सौदे के मामले में पूरी तरह से पारदर्शिता बरती गई है, सौदे में कहीं भी किसी भी प्रकार की कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। रॉफेल मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने केन्द्र सरकार को कांग्रेस के आरोपों से बरी कर दिया है। इसलिए प्रथम दृष्टया यह भी प्रमाणित हो जाता है कि वर्तमान में कांग्रेस पार्टी झूठ के माध्यम से सत्ता पाने का मार्ग तलाश कर रही है। लोकसभा चुनाव में भी ऐसा ही हुआ था। कांग्रेस की सबसे बड़ी मजबूरी यही है कि उसे वर्तमान केन्द्र सरकार के विरोध में किसी भी प्रकार का ऐसा मुद्दा नहीं मिल रहा, जिससे वह सरकार को घेर सके। मोदी के नेतृत्व में चलने वाली सरकार ने राजनीतिक स्तर पर होने वाले भ्रष्टाचार को काफी हद तक रोका है।

इसी वर्ष हुए लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान केवल रॉफेल ही नहीं, बल्कि अन्य कई प्रकार के ऐसे बयान भी सुनाई दिए, जो राजनीतिक मर्यादा को लांघने वाले रहे। इसमें किसी एक दल को आरोपित करना न्याय संगत नहीं होगा, क्योंकि आरोपों की प्रतिक्रिया भी देखने को भी मिली। ऐसे में सबसे बड़ा प्रश्न यह भी आता है कि हमारे देश की राजनीति किस दिशा में जा रही है? क्या इस प्रकार की राजनीति देश के लिए प्रगतिगामी हो सकती है। वास्तव में लोकतांत्रिक राजनीति का अर्थ यही है कि जनता की भावनाओं और देश हित का पूरी तरह से ध्यान रखना चाहिए, लेकिन वर्तमान में भारत की राजनीति खास तौर से विपक्षी दलों की राजनीति कमोवेश स्वार्थ केन्द्रित और सत्ता केन्दित ही होती जा रही है। ऐसी राजनीति से यह भी स्पष्ट हो जाता है कि इसमें देश हितों की भी बलि दे दी जाती है। जनता के हित की बात तो बहुत ही दूर हो जाती है। जब ऐसा होता है तो फिर झूठ का सहारा लिया जाता है। रॉफेल मामले में भी इसी प्रकार की राजनीति की गई। जिसमें कुछ भी प्रमाणित नहीं था, लेकिन करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए।

कहा जाता है कि व्यक्ति जैसा होता है, वह दूसरे के बारे में भी वैसा ही सोचता है यानी चोर को चोर और ईमानदार को ईमानदार ही दिखाई देता है। हम यह कतई नहीं कह रहे कि कांग्रेस चोर है, लेकिन उसने जिस दृष्टि से केन्द्र की सरकार को देखा है, उससे कम से कम यह सवाल अवश्य ही खड़ा होता है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय के बाद कांग्रेस फिर से सवालों के घेरे में है। कांग्रेस को इन सवालों के जवाब देने ही चाहिए। कहा जा सकता है कि कांग्रेस इस बारे में जितनी सफाई देगी, वह उतनी ही दल दल में फंसती जाएगी। क्योंकि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस बारे में एक नहीं, कई झूठ बोले हैं। यहां तक कि फ्रांस के राष्ट्रपति के झूठे बयान को भी आधार बनाया गया, जिसे फ्रांस की ओर से ही खारित कर दिया गया।

लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रॉफेल को लेकर जिस प्रकार के आरोप केन्द्र सरकार और व्यक्तिगत रुप से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर लगाए थे, वह पूरी तरह से निराधार ही थे, लेकिन उस समय राहुल गांधी द्वारा कहा जा रहा था कि उनके पास इस बात के प्रमाण हैं कि रॉफेल सौदे में चोरी हुई है और चौकीदार चोर है। अगर कांग्रेस के पास इस बात के प्रमाण होते तो स्वाभाविक था वह इन प्रमाणों को सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत करती, लेकिन कांग्रेस ऐसा नहीं कर सकी। इसलिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी को अपने गलत बयान पर माफी भी मांगी थी। जो यह सिद्ध करता है कि वह गलत ही थे, क्योंकि माफी वही मांगता है, जो गलती करता है।

सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी को यह सबक देने के लिए पर्याप्त है कि उन्हें अब ऐसे बयानों के मामले में सावधानी रखना चाहिए। लेकिनसवाल यह आता है कि बार बार अपने बयानों के कारण उपहास का पात्र बनने वाले राहुल गांधी इस बार कुछ सीखने का प्रयास करेंगे। उल्लेखनीय है कि एक बार रॉफेल मामले में पुनर्विचार याचिका स्वीकार कर लेने के बाद राहुल गांधी ने इसकी गलत व्याख्या करते हुए कहा था कि अब तो सर्वोच्च न्यायालय ने भी मान लिया है कि चौकीदार चोर है, जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने ऐसा कहा ही नहीं था। इसके बाद राहुल गांधी को न्यायालय की फटकार भी सुननी पड़ी थी। अब देखना यह है कि राहुल गांधी अपने झूठ के लिए देश से माफी मांगते हैं या नहीं।

रॉफेल मामले में कांग्रेस बेपरदा हो चुकी है। इस मामले को लेकर भले ही कांग्रेस ने जमकर राजनीति की, लेकिन पहले देश की जनता से कांग्रेस को पूरी तरह से नकार दिया था और अब सर्वोच्च न्यायालय ने भी कांग्रेस को यह बता दिया है कि वह इस मामले को लेकर झूठ ही प्रसारित कर रही थी। इस प्रकार की राजनीति कोई भी दल करे, वह पूरी तरह से बंद होना चाहिए, क्योंकि इससे जनता को गुमराह करने का खेल खेला जाता है जो किसी भी प्रकार से उचित नहीं कहा जा सकता।