रेलवे उपद्रवियों के निशाने पर, 68 घटनाएं हुई : प्रभु

नयी दिल्ली, (वार्ता) : रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने आज माना कि रेलवे पिछले कुछ समय से अपराधियों और उपद्रवी तत्वों के निशाने पर आ गयी है और विगत वर्ष में 68 ऐसी घटनायें प्रकाश में आयी है। श्री प्रभु ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में कहा कि रेल संरक्षा हमेशा से उनकी प्राथमिकता में शीर्ष पर है पर पिछले कुछ समय से देखा गया है कि अपराधी और उपद्रवी तत्वों ने रेलवे को आसान निशाना बना लिया है। एक साल के अंदर सात बम विस्फोट के प्रयास, 58 तोडफ़ोड़ के प्रयास और तीन ट्रैक को प्रभावित करने के मामले सामने आये है।

रेल मंत्री ने कहा कि अधिकतर मामलों में साजिश को विफल कर दिया लेकिन कानपुर सहित कुछ हादसे नहीं रोके जा सके। उन्होंने कहा कि उनकी जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी को सौंपी गयी है। उन्होंने कहा कि कानपुर रेल हादसे के लिए गुजरात स्थित राष्ट्रीय फोरेंसिक प्रयोगशाला के महानिदेशक से सहायता लेने के लिए रेल सुरक्षाबल के महानिदेशक को कहा गया है।

उन्होंने कहा कि हमें समूचे संरक्षा एवं सुरक्षा तंत्र को पुनर्गठित एवं पुनव्र्यवस्थित करने की आवश्यकता है यह काम पाँच साल में पूरा किया जाएगा। रेल मंत्री ने कहा कि रेल हादसों में बाहरी हस्तक्षेप होने के बावजूद रेलवे अपने दायित्व को लेकर भी पूरी तरह सजग है एवं जिम्मेदारी स्वीकार करती है।

उन्होंने कहा कि इस बार के बजट में पाँच साल के लिए एक लाख करोड़ रूपए के संरक्षा कोष मंजूरी दी गयी है। हर साल 20 हजार करोड़ रूपये खर्च होंगे। उन्होंने कहा कि ट्रैक नवीकरण का काम द्रुतगति से चल रहा है। इस साल 2017-18 के बजट में दस हजार करोड़ रूपए का प्रावधान पटरियों को बदलने के लिए आवंटित किया है। इस साल ट्रैक नवीरकण का काम पूरा हो जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि संरक्षा एवं सुरक्षा के लिए फ्रांस, इटली, जापान और दक्षिण कोरिया के प्रतिनिधिमंडल यहाँ दौरे पर आये है और उनके सुझावों को भी अमल में लाया जाएगा।

उन्होंने बताया कि ट्रैक में गड़बड़ी का पता लगाने के लिए अल्ट्रासोनिक फ्लॉ एवं ब्रोकेन रेल, डिटेक्शन सिस्टम और स्पार्ट कार की खरीद की जा रही है। इसके अलावा सभी रेल कर्मचारियों को भी सरंक्षा एवं सुरक्षा के प्रति सतर्क किया गया है तथा इसमें उनका सक्रिय सहयोग लिया जा रहा है।