यह मिथ्या है कि कुपोषण की समस्या सिर्फ गरीबों और आदिवासी परिवारों में है: ईरानी

नयी दिल्ली,  महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने शुक्रवार को कहा कि यह धारणा सही नहीं है कि कुपोषण की समस्या सिर्फ गरीब एवं आदिवासी परिवारों में होती है।

उन्होंने लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान यह भी कहा कि नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ नौ फीसदी बच्चों को ही पूरी तरह सही पोषण मिल पा रहा है। इसका मतलब यह है कि अमीर घरों के लोग बच्चों के आहार की मात्रा पर ज्यादा और गुणवत्ता पर कम ध्यान दे रहे हैं।

दादर एवं नगर हवेली के सांसद मोहनभाई डेलकर के पूरक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने यह जवाब दिया। दरअसल, डेलकर ने सवाल किया कि आदिवासी समुदायों के बच्चों में कुपोषण की समस्या ज्यादा होती है और ऐसे में सरकार क्या कदम उठा रही है।

ईरानी ने कहा कि यह मिथ्या है कि कुपोषण की समस्या सिर्फ गरीब और आदिवासी परिवारों में है। स्मृति ईरानी ने सितंबर महीने में संपन्न पोषण माह का उल्लेख करते हुए कहा कि सबके सहयोग से 1.66 करोड़ गतिविधियां हुईं और समुदाय आधारित 2.26 करोड़ कार्यक्रम आयोजित किए गए।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सांसदों से कहा कि वे अपने क्षेत्र में कुपोषण को समाप्त करने का प्रयास करें ताकि 17वीं लोकसभा के अंतिम सत्र में सब कह सकें कि देश कुपोषण से मुक्त हो गया है।