मानसून ने दिया देश के जलाशयों को रिकार्ड तोड़ पानी, उ प्र और झारखंड में दिखा बारिश की कमी का असर

नयी दिल्ली,  पिछले चार महीनों के दौरान दक्षिण पश्चिम मानसून में हुयी भरपूर बारिश का असर जलसंग्रह के रूप में, केन्द्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) की निगरानी वाले 120 जलाशयों में रिकार्ड तोड़ पानी एकत्र होने के रूप में दिखा है।

गत 10 अक्टूबर को दक्षिण पश्चिम मानसून की वापसी शुरु होने के बाद सीडब्ल्यूसी के क्षेत्राधिकार वाले देश के सभी 120 जलाशयों में 17 अक्टूबर तक कुल क्षमता का 89 प्रतिशत जलसंग्रह हो गया है।

मौसम विभाग के वैज्ञानिक रंजीत सिंह ने इस साल निर्धारित समय से देर से हुयी मानसून की वापसी के हवाले से कहा कि दक्षिण पश्चिम मानसून में सामान्य से लगभग 10 प्रतिशत अधिक बारिश होने के कारण सभी नदी बेसिन सहित अन्य जलसंग्रह क्षेत्रों में रिकार्ड तोड़ पानी की उपलब्धता हुयी।

उन्होंने इसे बारिश के पानी को जलाशयों तक पहुंचाने के लिये विभाग द्वारा पिछले एक साल में किये गये तकनीकी उपायों का भी परिणाम बताया।

जलाशयों में जलसंग्रह संबंधी सीडब्ल्यूसी के 17 अक्टूबर तक के आंकड़ों के मुताबिक 170.3 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) क्षमता वाले 120 जलाशयों में इस साल क्षमता का 89 प्रतिशत (151.9 बीसीएम) पानी एकत्र हुआ है। पिछले साल इन जलाशयों में एकत्र हुये पानी की मात्रा 125.2 बीसीएम थी। इस साल का जलसंग्रह पिछले दस साल के औसत स्तर 122.7 बीसीएम से काफी अधिक है।

उल्लेखनीय है कि सीडब्ल्यूसी के 120 जलाशयों के अतिरिक्त भारत में कुल जलसंग्रह क्षमता 257.8 बीसीएम है।

क्षेत्रीय आधार पर मानसून के वितरण का असर भी जलाशयों में जलसंग्रह के रूप में स्पष्ट दिख रहा है। सर्वाधिक जलसंग्रह पश्चिमी क्षेत्र में गुजरात और महाराष्ट्र में सीडब्ल्यूसी की निगरानी वाले 41 जलाशयों में जलसंग्रह क्षमता 34.83 बीसीएम के विपरीत इस साल 32.44 बीसीएम पानी एकत्र हुआ है। इन जलाशयों में जलसंग्रह का स्तर इस साल 93 प्रतिशत की तुलना में पिछले साल महज 61 प्रतिशत था।

इसके उलट मध्य क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में सीडब्ल्यूसी के क्षेत्राधिकार वाले 18 जलाशयों में कुल जलसंग्रह क्षमता 44.14 बीसीएम की तुलना में 39.45 बीसीएम (क्षमता का 89 प्रतिशत) पानी एकत्र हुआ है। हालांकि उत्तर भारत के मैदानी इलाकों हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में इस साल बारिश की कमी का असर उत्तर क्षेत्र के जलाशयों में अन्य क्षेत्रों की तुलना में कम जलसंग्रह के रूप में स्पष्ट रूप से दिखा है।

सीडब्ल्यूसी के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश में सीडब्ल्यूसी के 6.83 बीसीएम क्षमता वाले चार जलाशयों में सबसे कम 66 प्रतिशत (4.53 बीसीएम) जलसंग्रह हुआ। हालांकि इन जलाशयों में पिछले साल 4.46 बीसीएम जलसंग्रह की तुलना में इस साल थोड़ा ज्यादा है।

वहीं, उत्तरी क्षेत्र के तीन राज्यों हिमाचल प्रदेश, पंजाब और राजस्थान के आठ जलाशयों और पूर्वी क्षेत्र में झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और नगालैंड के 17 जलाशयों में कुल क्षमता का 88 प्रतिशत, मध्य क्षेत्र में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ के 18 जलाशयों में 90 प्रतिशत और दक्षिणी क्षेत्र में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल तथा तमिलनाडु के 36 जलाशयों में कुल क्षमता का 87 प्रतिशत जलसंग्रह हुआ है।

सीडब्ल्यूसी के आंकड़ों के मुताबिक गंगा, नर्मदा, सिंध और कृष्णा कावेरी सहित सभी नदी बेसिन में पिछले साल की तुलना में इस साल पानी की मात्रा बेहतर है। सिर्फ हिमाचल प्रदेश, पंजाब, त्रिपुरा और केरल के जलाशयों में ही पिछले साल की तुलना में कम जलसंग्रह हुआ है।