ब्याज दरांे के मोर्चे पर आठ फरवरी को यथास्थिति कायम रखेगा रिजर्व बैंक

नयी दिल्ली,  नोटबंदी के बाद बैंकांे के पास भारी मात्रा में नकदी पहुंच चुकी है और वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से मुद्रास्फीति बढ़ने की आशंका है। ऐसे में माना जा रहा है कि रिजर्व बैंक आगामी आठ फरवरी को मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दरांे के मोर्चे पर यथास्थिति कायम रखेगा।

हालांकि, जनवरी में सेवा क्षेत्र में लगातार तीसरे महीने गिरावट आई है ऐसे में उम्मीद है कि कंेद्रीय बैंक मौद्रिक नीति में नरम रख पर कायम रहेगा।

सरकार ने पिछले साल नवंबर में 500 और 1,000 के नोटांे को बंद करने की घोषणा की थी जिसके बाद बैंकांे के पास भारी राशि जमा हुई है। इसकी वजह से पिछले महीने ब्याज दरों में एक प्रतिशत तक की गिरावट आई है।

हालांकि, बैंक और उद्योग नीतिगत दरांे यानी रेपो दर में कटौती की मांग कर रहे हैं, लेकिन समझा जाता है कि रिजर्व बैंक गवर्नर उर्जित पटेल की अगुवाई वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति :एमपीसी: आठ फरवरी को सतर्क रख अपनाएगी। मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी तथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संरक्षणवादी रख की वजह से ब्याज दरों में कटौती की गुंजाइश काफी कम है।

ब्रेंट क्रूड जहां चढ़कर 56.8 डालर प्रति बैरल पर पहुंच गया है वहीं ट्रंप ने कई संरक्षणवादी उपायांे की घोषणा की है जिसका असर भारत सहित वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिखाई देगा।

वित्त मंत्रालय ने सब्सिडी की गणना के लिए अगले वित्त वर्ष में कच्चे तेल का औसत दाम 65 से 70 डालर प्रति बैरल लिया है।