पुष्पामिशन अस्पताल जमीन के मुकदमे में नया मोड़ आया।

अपरकलेक्टर, जिला उज्जैन ने निगरानी प्रकरण में डायोसिस की ओर से प्रस्तुत निगरानी स्वीकार करते हुए तहसीलदार, उज्जैन व उनके द्वारा गठित पेनल की ओर से किये गये सीमांकन को निरस्त किया। उल्लेखनीय है कि पुष्पामिषन अस्पताल की भूमि में पूर्व सांसद के निजीसहायक के पिता नीलम सिंह रघुवंषी द्वारा सीमा का विवाद करते हुए एक सीमांकन का आवेदन तहसीलदार, उज्जैन के न्यायालय में प्रस्तुत किया था जिस पर से तहसीलदार ने सीमांकन की कार्यवाही जो की थी उसीपर से डायोसिस एवं पूर्व सांसद के निजीसहायक के मध्य विवाद प्रारंभ हुआ था। डायोसिस की ओर से पहले सीमांकन को उच्चन्यायालय, खण्डपीठ इंदौर में याचिका लगाकर चुनौती दी थी बाद में उस सीमांकन के लिये याचिका के निर्देष में दीवानीदावापंचम व्यवहार न्यायाधीष महोदय, वर्ग-2 उज्जैन के न्यायालय में प्र्रस्तुत किया था जिस में व्यवहार न्यायालय ने डायोसिस का अस्थाई निषेधाज्ञा का आवेदनपत्र निरस्तकर दिया था उसके विरूद्ध डायोसिस ने अपील अष्टम अपरजिला जज महोदय, उज्जैन के न्यायालय में प्रस्तुत की थी । इसी मध्ध्य सांसद के निजीसहायक ने पुष्पामिषन परिसर में 12/3/2018 कोकाफीतोड़फोड़ भी करवाई थी जिसके संबंध में पहले समाचारपत्रो ंमे ंप्रकाषन भी हुआ था। यह अपील स्वीकार हुई थी और उसमें व्यवहार न्यायाधीषमहोदय, वर्ग-2, उज्जैन के आदेष को निरस्त करते हुए पुष्पा मिषन हॉस्पिटल के हित में अस्थाई निषेधाज्ञा जारी की गई थी। अष्टम अपरजिला जजमहोदय, उज्जैन ने अपने आदेष में सीमांकन पंचनामे को संदेहास्पद व संदिग्ध माना था, इसके अतिरिक्त उक्तसी मांकन को नीलम सिंह रघुवंषी को लाभ पहुंचाने वाला भी निराकृत किया गया था व अतिरिक्त जिला न्यायालय ने इस संबंध में भी उनके आदेष में कब्जे में व्यवधान की परिधि का माना था। अष्टम अपरजिला जजमहोदय, उज्जैन के आदेष को नीलमसिंह ने उच्चन्यायालय, खण्डपीठ इंदौर मे ंभी चुनौती दी थी और उसकी याचिका निरस्त की गई थी।साथ ही माननीय म.प्र. उच्चन्यायालय ने कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक, उज्जैन कोडायोसिस को सुरक्षा प्रदान करने के भी निर्देष दिये थे। डायोसिसअस्पतालप्रबंधन की ओर से सीमांकनकोराजस्वमण्डल, ग्वालियर के समक्ष भीचुनौती दी गई थी।राजस्वमण्डल ने उक्त निगरानी को कलेक्टर, उज्जैन के समक्ष निराकरण हेतु भेजा था जिस पर से अपर कलेक्टर, उज्जैन श्रीऋषव गुप्ता ने दोनों पक्षों के तर्कसुनने के पष्चात् डायोसिस की ओर से उसके अधिवक्ता श्री मुरारीलाल पाठक के तर्कों से सहमत होते हुए सीमांकन की कार्यवाहीकोभू-राजस्वसंहिता के प्रावधनों के विपरीत व उसमें बनाये गये नियमों के उल्लंघन का मानकर व जोसर्वे नंबर कायम हुआ था उसका विभाजन हुआ या नहीं, इन समस्त प्रक्रियाओं को संदेहास्पद मानकर निरस्त किया है।इस आदेष के पारितहोने से डायोसिसप्रबंधन ने व्यक्त किया कि फिलहाल सत्य की विजय हुई है और पहले जो राजस्व अधिकारियों ने राजनीतिक दबाव में आकर गलत सीमांकन किया था उसे निरस्त किया गया है।