पहली बार धुलेंगे जेल के कंबल

रायपुर, :भाषा: छत्तीसगढ़ का जेल विभाग इन दिनों कंबल धोने की तैयारी कर रहा है। यह पहली बार है जब राज्य के जेलों में कंबल धुलंेगे।

छत्तीसगढ़ के केंद्रीय जेल में बंद हरिराम :परिवर्तित नाम: पिछले कुछ समय से चर्म रोग से पेरशान है। केवल हरिराम ही नहीं राज्य के अन्य जेलों में बंद कैदी भी एलर्जी और अन्य रोगों के कारण अस्पताल का चक्कर लगाते रहते हैं। ऐसे में जब जेल विभाग ने इसका कारण जानना चाहा तो जानकारी मिली कि जेल के कंबल कभी नहीं धुलते और इसके कारण ही कैदियों को इन बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है।

शायद आपको यह जानकर हैरानी होगी कि जेल के कंबल कभी नहीं धुलते । कीटाणु रहित करने के नाम पर इन कंबलों को केवल धूप ही दिखाई जाती है लेकिन अब कंबलों को धोने की तैयारी की जा रही है।

जेल विभाग के अधिकारियों ने भाषा को बताया कि पिछले कुछ समय में राज्य के विभिन्न जेलों में लगभग 22 हजार कैदियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इस दौरान पाया गया कि ज्यादातर कैदियों को चर्म रोग और एलर्जी की समस्या है।

अधिकारियों ने बताया कि जब समस्या से निपटने के प्रयास किए गए तब पाया गया कि जेल में सफाई का तो ध्यान रखा जाता है लेकिन कंबल कभी नहीं धुलते । अब इस समस्या से निपटने के लिए इंडस्ट्रियल वाशर की खरीद की जा रही है।

यदि आंकड़ों पर गौर करें तो राज्य में पांच सेंट्रल जेल, 12 जिला जेल और 16 उप जेल हैं। इन जेलों में 18 हजार से ज्यादा कैदी हैं। जिनमें 10 हजार विचाराधीन और आठ हजार सजायाफता कैदी हैं। वहीं कुछ कैदी छोटे मोटे अपराधों के कारण जेलों में आते है और छूट जाते हैं। मौसम के अनुसार एक कैदी को दो से तीन कंबल दिए जाते हंै। इस तरह सभी कैदियों के पास कुल मिलाकर 54 हजार कंबल हंै। लेकिन इन कंबलों को साफ करने या धोने की कोई व्यवस्था नहीं है। इसीलिए यह कंबल अब बीमारी का कारण बन गए हैं।

जेल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक एक कंबल पांच साल चलता है और इस दौरान यह कंबल एक कैदी के बाद दूसरे कैदी को उपयोग के लिए दे दिया जाता है। इस दौरान न कंबल की सफाई होती है न धुलाई। हां कभी कभी उन्हें धूप जरूर दिखाई जाती है।