जीन में फेरबदल कर पहली बार टीबी से सुरक्षित गाय का विकास

बीजिंग, : भाषा : चीनी वैज्ञानिकों ने जीन एडिटिंग तकनीक सीआरआईएसपीआर : सीएएस 9 का इस्तेमाल करते हुए पहली बार सफलतापूर्वक ऐसी गायों को विकसित किया है जो गौधन में होने वाली टीबी से सुरक्षित हांेगी।

चीन में नार्थवेस्ट ए एंड एफ यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने सीआरआईएसपीआर जीन एडिटिंग तकनीक के संशोधित संस्करण का इस्तेमाल किया और गाय के जीनोम में एक नया जीन डाला जिसका जानवरों के जेनेटिक्स पर कोई असर नहीं पाया गया । पहले सीआरआईएसपीआर का इस्तेमाल करते हुए ट्रांसजेनिक जानवरों के विकास में यह समस्या काफी आड़े आती थी।

प्रमुख शोधकर्ता योंग झेंग ने कहा, ‘‘ हमने सीआरआईएसपीआर प्रणाली के नए संस्करण सीआरआईएसपीआर : सीएएस 9 एन का इस्तेमाल किया और सफलतापूर्वक एक टीबी प्रतिरोधी जीन को गाय के जीनोम में डाला । इस टीबी प्रतिरोधी जीन को एनआरएएमपी 1 नाम दिया गया है ।

झेंग ने बताया, ‘‘ इसके बाद हम सफलतापूर्वक जिंदा गाय विकसित करने में सफल हो गए जिसकी टीबी के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बढ़ गयी थी। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि हमारी इस प्रक्रिया से गाय के जेनेटिक्स पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पाया गया । इसका मतलब यह है कि सीआरआईएसपीआर तकनीक ट्रांसजेनिक पशुधन के विकास के लिए बेहतर सफल हो सकती है ।’’ सीआरआईएएपीआर एक ऐसी तकनीक है जिसका हालिया वषरे में प्रयोगशालाओं में व्यापक इस्तेमाल किया जा रहा है क्योंकि यह सटीक है और तुलनात्मक रूप से जेनेटिक कोड में फेरबदल करने का आसान तरीका है ।

लेकिन कई बार ऐसा होता था कि जेनेटिक कोड में अवांछित बदलाव भी आ जाते थे जो इस प्रक्रिया का दुष्प्रभाव कहा जा सकता है । इसलिए इस दुष्प्रभाव को कम करना जिनोमिक्स शोधकर्ताओं की शीर्ष प्राथमिकता थी।