जपजी साहब : गुरूनानकजी की जोत का 19 भाषाओं में अनुवाद

नयी दिल्ली, दुनिया को एक सूत्र में पिरोने का संदेश देने वाली गुरूनानक देव जी की वाणी ‘एक ओंकार सत नाम…..’ जपजी साहिब का दुनिया की 19 भाषाओं में अनुवाद किया गया है और गुरूनानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के मौके पर अमृतसर में श्री हरमंदिर साहिब के संग्रहालय को सौंपा जाएगा।

सिख धर्म इंटरनेशनल :एसडीआई: ने दुनियाभर में बसे अपने सदस्यों के सहयोग से गुरूनानक देव जी की मूल वाणी ‘जपजी साहब’ के अंग्रेजी और विश्व की अन्य 18 भाषाओं में अनुवाद की व्यवस्था की है। ‘‘जपजी साहिब – द लाइट आफ गुरू नानक फॉर द वर्ल्ड’’ शीर्षक की इन किताबों के रंगीन आवरण पर गुरूनानक देव जी का चित्र है, जिसके चारों ओर एक ओंकार का पवित्र चिन्ह है। चांदी के आवरण पर सुंदर बेल बूटे उकेरे गए हैं और इसे मोती तथा कीमती नगों से सजाया गया है।

प्रत्येक किताब के 400 पन्नों को बहुत कलात्मक अंदाज में तैयार किया गया है और इसके किनारों पर उस देश के फूलों के चित्र उकेरे गए हैं, जिस देश की भाषा में इसका अनुवाद किया गया है।

अमेरिका में 1973 में स्थापित एसडीआई से संबद्ध शांति कौर खालसा ने यह जानकारी देते हुए बताया कि गुरूनानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के अवसर पर ‘जपजी साहब’ की ये प्रतियां दुनियाभर में फैले सिख समुदाय के सदस्यों की तरफ से अमृतसर में श्रीहरमंदिर साहब स्थित संग्रहालय को सौंपी जाएंगी।

उन्होंने कहा कि इस प्रयास के जरिए हम चाहते हैं कि हमारी आने वाली पीढ़ियां ‘जपजी साहब’ के अर्थ की गहराई और इसकी शिक्षाओं को सही तरीके से समझकर अपने जीवन में आत्मसात कर सकें।

उन्होंने बताया कि गुरूनानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व के मौके पर सिख धर्म द्वारा एक विशाल यात्रा का भी आयोजन किया जा रहा है जिसमें अन्य लोगों के अलावा अमेरिका, कनाडा, मेक्सिको, ब्राजील, जर्मनी, स्विटजरलैंड, ब्रिटेन, इटली और एस्तोनिया से करीब 100 लोगों के भाग लेने की संभावना है।

दिल्ली सिख गुरूद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने ‘जपजी साहब’ की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह गुरू नानक देव जी की मूल वाणी है और गुरू ग्रंथ साहिब की शुरूआत भी ‘जपजी साहब’ से ही होती है। यह वाणी सिख धर्म की मर्यादा के अनुसार रोजाना पढ़ी जाने वाली पांच वाणियों में भी प्रथम वाणी है।

उन्होंने ‘जपजी साहब’ के दुनिया की 19 भाषाओं में अनुवाद को एक सराहनीय कदम करार देते हुए कहा कि गुरूनानक जी का संदेश या उपदेश किसी एक धर्म या संप्रदाय के लिए नहीं है। वह तो सारी दुनिया को एक सूत्र में पिरोने का संदेश देते हुए पूरी मानवता के कल्याण की कामना करते हैं।