मैगजीन के बहाने मोदी पर निशाना

अपना टाइम आयेगा की तरह देश में कुछ तथाकथित बुद्धिजीवी और विपक्ष टाइम मैगजीन पर मोदी की तस्वीर देखकर अपने मुस्कुराने का टाइम लौटाने की कल्पना कर रहे हैं|मैगजीन के कवर पर प्रधानमंत्री मोदी जी की तस्वीर छपी है और मोटे अक्षरों में लिखा है इंडियाज डिवाइडेड इन चीफ।मजे की बात यह है कि डिवाइडर शब्द उसके लिए प्रयोग हो रहा है जिसमे सिर्फ देश ही नहीं विदेशों में भी सबको साथ लेकर चलने की बात कही और उसे जीवंत भी किया और डिवाइडर शब्द देख कर वह खुश हो रहे हैं जिन्होंने हमेशा समाज को बांटने की राजनीति की और एक खास दरबार के लिए पत्रकारिता की।सवाल यह है कि अगर मोदी देश को बांट रहे हैं तो देश में एकता कौन फैला रहा है ?

देवानंद राय

उमर अब्दुल्ला, जिनकी पार्टी बाद बात पर पाकिस्तान में शामिल होने की बात कहती है|महबूबा मुफ्ती जिनका दिल और दिमाग पाकिस्तान की तरफदारी में बाहें फैलाए खड़ा रहता है या वह ममता जी जो देश के प्रधानमंत्री को प्रधानमंत्री नहीं मानती पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री उन्हें अच्छे लगते हैं|जिन्होंने बंगाल में बिहार जैसे हालात पैदा कर दिए। जहाँँ जय श्री राम बोलने पर जेल हो जाती है जहां पर कार्टून बनाने पर भी जेल हो जाती है। न जाने कहाँँ है वह अभिव्यक्ति की आजादी वाले लोग ?जो ऐसी चीजों पर चुप हैं वरना पहले तो इसी के नाम पर अवार्ड वापसी तक हो गई।जहां सीएम, पीएम को थप्पड़ मारने की बात सरेआम रैली में बोलता है।या फिर वह नक्सली के ऊपर शहरी बुद्धिजीवी का चोला ओढ़ है लोग जो प्रधानमंत्री को मारने की साजिश रचते हैं।या फिर वह युवा हार्दिक, अल्पेश, जिग्नेश जो तरह-तरह के पाटीदार आंदोलन,आरक्षण आंदोलन और अन्य मांगों को लेकर पहले राज्य में दंगा भड़काते हैं और बाद में कांग्रेस की गोद में जाकर बैठ जाते हैं या फिर वह लोग देश में एकता ला रहे हैं जो इस तरह की पत्रकारिता किसी खास दरबार में अपना सर झुक सलाम ठोकते हैं और बाहर आकर निष्पक्ष होने का ढिंढोरा पीटते हैं।वह नामदार राहुल जी जो सार्वजनिक रूप से कश्मीर से चाहिए आजादी, आजादी गैंग और भारत के टुकड़े हो इंशाल्लाह नारा लगाने वालों के साथ खड़े रहते हैं। क्या यह लोग भारत में एकता ला रहे हैं ? टाइम मैगजीन के कवर स्टोरी लिखने वाले आतिश खुद बताएं अगर मोदी बांट रहा है तो भारत को जोड़ कौन रहा है ? मैगजीन कहती है कि मोदी नाकाम है तो राष्ट्रवाद का सहारा ले रहे हैं तो विपक्ष को किसने रोका है ? वंदे मातरम का नारा लगाने को, भारत माता की जय कहने को, सेना की पीठ थपथपाना को पर उनके तो राजनीतिक विरोध के चक्कर में भारत विरोधी होना उनके डीएनए में शामिल हो चुका है| मैगजीन यह भी कहता है कि मोदी 2014 में मसीहा थे अब राजनेता बन गए तो राहुल भी तो 2014 से पहले यूथ आईकॉन थी अब तो पप्पू बन गए इस पर खोजी पत्रकार का ध्यान नहीं गया क्या ? न्यूज़ पोर्टल द वायर में छपा हुआ लेख उठाकर थोड़ा मिर्च मसाला लगाकर टाइम मैगजीन में छाप दिया सोचा कि देश में हाहाकार मच जाएगा लोग ट्विटर पर ट्वीट करेंगे और मैगजीन आनी थी 20 मई तो उससे पहले धड़ाधड़ ऑनलाइन बुकिंग हो जाएगी अरे भैया वह जमाने गए जब दिल्ली से कोई खबर छपती थी और पूरे भारत में पहुंचने में महीने लगते थे और वह खबर 6-6 महीने चलती थी| अरे अब सब सेकंडों में हर खबर हर किसी के पास पहुंच रही है और मिनटों में आपकी पूरी कुंडली खंगाल कर रख दी जा रही है। बेचारे चमचे जो थोड़ी बहुत मुस्कुराना चाहते थे इंटरनेट और सोशल मीडिया ने वह भी छीन लिया।अब तो पूरे देश को पता चल गया कि लेख लिखने वाला पाकिस्तानी है मिक्स ब्रीड का है इसलिए बहुत नफरत है हिंदुस्तान के लिए क्योंकि हिंदुस्तान ने पाकिस्तान के हाथ कटोरा थमा दिया है। जो व्यक्ति विदेशों में भारत का मान बढ़ा रहा है वह इनकी नजरों में देश बांट रहा है।जो व्यक्ति आतंकवाद पर पूरे विश्व को एक मंच पर एकजुट करता है और चीन को वीटो पावर वापस लेने को मजबूर करता है वह इनके नजर में देश को बांट रहा है।जो व्यक्ति पर्यावरण के मुद्दे पर अमेरिका के पेरिस सम्मेलन से बाहर होने पर पूरे विश्व का नेतृत्व करता है,वह इनकी नजर में डिवाइडर है। और इन सब से कहीं ऊपर विश्व योग दिवस के प्रस्ताव द्वारा पूरे विश्व को एक सूत्र में बांधा है वह इन लोगों के लिए लोगों को बांटता है अरे इन लोगों ने तो योग पर भी फतवा जारी कर रखा है।जिस व्यक्ति ने सार्क संगठन के लिए दक्षिण एशियाई सेटेलाइट द्वारा देश ही नहीं विदेशों में भी सबका साथ सबका विकास के सिद्धांत को वास्तविकता में बदल कर रख दिया वह लोगों को बांटता है तो आतिश जैसे लोगों को अपने चश्मे के साथ अपना दिमाग भी बदलना चाहिए। कुछ बुद्धिजीवी कह रहे हैं आतिश को पाकिस्तानी के नजर से नहीं बल्कि एक पत्रकार के नजर से देखना चाहिए इस प्रकार का नैतिकता का पाठ पढ़ाने वाले लोग सब चुप क्यों हो जाते हैं ? जब आजादी के बाद सबसे अधिक महिलाओं का मंत्रिमंडल में जगह से लेकर मुस्लिम महिलाओं की नर्क से बदतर जिंदगी से बाहर निकालकर तीन तलाक समाप्त करने और हलाला जैसे सामाजिक कुरीति को मिटाने का प्रयास आतिश को नजर नहीं आते और वह मैगजीन में इसके उलट लिखते हैं| आतिश को महिला शोषण और मुस्लिम महिलाओं की स्थिति पर और रिसर्च करने की आवश्यकता है किसी दूसरे पोर्टल से पर लिखे आर्टिकल शेयर करने की आवश्यकता इन दिनों रवीश बाबू कर रहे हैं। मैगजीन यह भी कहती है। क्या दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र मोदी सरकार और पांच साल सहन कर सकता है ? इसका जवाब टाइम मैगजीन सहित राग दरबारी और टाइम मैगजीन देख कर अपना टाइम वापस आने की सपने देखने वाले तथाकथित विपक्ष को 23 मई को मिल ही जाएगी वैसे इन को पहले से ही पता है इनका टाइम आए ना आए मोदी टाइम फिर से आने वाला है।

Leave a Reply