ठेकेदारी प्रथा से मुक्त हो बिजली विभाग

उज्जैन। म.प्र. बिजली आउटसोर्स कर्मचारी संगठन के प्रान्तीय मनोज भागर्व एवं उपाध्यक्ष राहुल मालवीय ने उज्जैन में निजी होटल में पत्रकार वार्ता में कहा कि राज्य सरकार की ओर से तीन मंत्रियों की मौजदगी में मंत्री बालाबच्चन जी ने मंत्रालय भोपाल में यह वायदा किया था कि म.प्र. सरकार बिना खर्च वाली मांग लोकसभा चुनाव के पहले पूरी करने को  तैयार है। इस घोषणा को एक माह गुजर चुका है, आचार संहिता लगाने वाली लेकिन आउटसोर्स सेवा प्रदाता कंपनी ठकेदारों के जरिये ठेका कर्मियों को वेतन देने की व्यवस्था बंद करते हुए इसके स्थान पर 6 बिजली कंपनियां सीधे तौर पर वेतन प्रदान करने की व्यवस्था लागू करने संबंधी जो मांग बिना वित्तीय भार वाली है उसे सरकार अब तक मंजूर नहीं कर रही है, जबकि म.प्र. के बिजली ठेकेदार प्रतिमाह ठेकाकर्मियों का 30 से 40 प्रतिशत वेतन की 476 करोड़ रूपये की राशि विभिन्न तरीके से हड़प लेते है।

बिजली अउउटसोर्स पदाधिकारियों का कहना है कि बिजली ठेकाकर्मी, वर्तमान ठेका प्रथा, इसलिये खत्म करवाना चाहते हैं क्योंकि ठेकेदारी प्रथा के कारण सर्विस प्रोवाईडर, ठेकेदार, मजदूरी राशि बैंक खाते में जमा होने के बावजूद भी कुशल श्रमिक से 300 रूपये एवं अकुशल श्रमिक से 2500 रूपये वेतन छीनकर हड़प लेता है, अन्यथा ठेकेदार द्वारा उसे कल से काम पर नहीं आने की धमकियां ठेकाकर्मी को दी जाती है। वर्तमान हालत यह है कि मध्यप्रदेश के अधिकांश ग्रिडो पर 4 की जगह 2 ऑपरेटर एवं 132 के.वी. सब स्टेशन पर 4 की जगह 2 सुरक्षा सैनिक प्रतिदिन 12 घण्टे एवं 26 दिन की जगह 30 दिन लगातार काम करने पर मजबूर है। जबकि वेतन चार ठेका कर्मचारियों का बिजली कंपनी के खाते से प्रतिमाह आहरित होता है लेकिन शेष दो ठेकाकर्मियों का वेतन कतिपय इंजीनियर व ठेकेदार मिलकर हड़प रहे है।

प्रान्तीय संयोजक मनोज भार्गव का कहना कि खेदजनक बात यह है कि जब पुलिस व सेना जैसे जोखिम पूर्ण क्षेत्र में आउटसोर्स जैसी अस्थायी व्यवस्था कायम नहीं है तो म.प्र. की बिजली कंपनियों में जहां प्रतिदिन 24 घण्टे एवं प्रतिवर्ष समूचे 365 दिन नियमित रूप से जाखिम पूर्ण काम करवाना है तो इस नियमित प्रकृति के काम को अस्थायी आउटसोर्सिग व्यवस्था के माध्यम से क्यों करवाया जा रहा है? जबकि जून 2005 से लेकर अब तक 14 वर्षो से चली आ रही ठेकेदारी प्रथा के दौरान म.प्र. में 400 ठेका कर्मचारी या तो स्थायी रूप से विकलांग हो गये या बेमौत मारे जा चुके है।

उपाध्यक्ष राहुल मावलीय कहना है कि यदि प्रदेश की नई सरकार कांग्रेस अपने वचन पत्र मे लिखे वादे को पुरा नहीं करती है तो हम लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करेगे और कांग्रेस को वोट नहीं देगे।

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