मौसम के उतार चढ़ाव, मिजाज में बदलाव की गारंटी नहीं : मौसम वैज्ञानिक

नयी दिल्ली,  इस बार सर्दी के मौसम में बेहद कम कोहरा, बार बार बारिश और मैदानी इलाकों में अप्रत्याशित ओलावृष्टि के कारण कश्मीर जैसी बर्फ दिखने से मौसम के तेजी से बदलते मिजाज का अहसास होता है। मौसम वैज्ञानिक हालांकि जलवायु परिवर्तन या ग्लोबल वार्मिंग को फिलहाल इसकी वजह नहीं मानते, लेकिन मौसम के इस उतार चढ़ाव के अप्रत्याशित होने से वह इंकार भी नहीं करते हैं। मौसम विभाग की क्षेत्रीय पूर्वानुमान इकाई के वरिष्ठ वैज्ञानिक कुलदीप श्रीवास्तव से इस विषय पर पेश हैं भाषा के पांच सवाल :

प्रश्न : दिल्ली एनसीआर क्षेत्र सहित मैदानी इलाकों में कश्मीर जैसी बर्फ दिखना क्या मौसम के मिजाज में बदलाव का भविष्य का संकेत नहीं है?

उत्तर : इस साल सर्दी के मौसम में उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में कुछ अप्रत्याशित पहलू देखने को मिले। इनमें बहुत कम कोहरा, तापमान का उतार चढ़ाव, तेज बारिश और अत्यधिक ओलावृष्टि शामिल है। पिछले कुछ दशकों में मौसम के मिजाज में इस तरह का बदलाव दिखना इसके स्थायित्व की गारंटी नहीं है। फिर भी यह अध्ययन का विषय जरूर है।

प्रश्न : क्या इसे मौसम चक्र में भविष्य के बदलाव का संकेत माना जा सकता है?

उत्तर : मौसम विज्ञान के मुताबिक इस प्रकार का तात्कालिक अनुमान लगाना तर्कसंगत नहीं है। इसे महज एक साल के दौरान मौसम में कुछ असामान्य बातों की झलक दिखना मात्र कह सकते हैं। मौसम चक्र में बदलाव की बात कई दशकों की पृष्ठभूमि और भविष्य में भी लगातार ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति के आधार पर ही कही जा सकती है।

प्रश्न : मौसम की इन अप्रत्याशित घटनाओं को क्या जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग से जोड़ कर देखा जा सकता है?

उत्तर : इसे फिलहाल जलवायु परिवर्तन या ग्लोबल वार्मिंग से जोड़ कर कतई नहीं देख सकते। अगर अगले कुछ साल तक लगातार यह स्थिति रहे, तब ऐसा अनुमान लगाया जा सकता है। इसलिये यह अध्ययन का विषय है। जहां तक इसकी वजह का सवाल है तो फौरी तौर पर पश्चिमी विक्षोभ को ही इसकी वजह माना जा सकता है। इस साल पिछले सालों की तुलना में पश्चिमी विक्षोभ अधिक आया। तापमान में गिरावट, हवा की तेज गति, सर्द दिन, अचानक तेज बारिश और मैदानी क्षेत्रों में ओलावृष्टि की एकमात्र वजह पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता है।

प्रश्न : पिछले सालों की तुलना में इस साल पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता का क्या स्वरूप रहा है?

उत्तर : गत जनवरी में उत्तर भारत के मैदानी इलाकों (पंजाब, हरियाणा, उत्तरी राजस्थान दिल्ली एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश) में पश्चिमी विक्षोभ सात बार देखने को मिला, जबकि जनवरी 2018 में यह संख्या चार थी। इसी तरह पिछले साल दिसंबर में भी चार बार पश्चिमी विक्षोभ के कारण इस साल सर्दी में मौसम का बार बार उतार चढ़ाव दिखा। इस साल फरवरी में पिछले सप्ताह आये पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता सर्वाधिक थी जिसकी वजह से एनसीआर क्षेत्र में अप्रत्याशित ओलावृष्टि हुयी। इसके पहले संभवता: वर्ष 1888 में उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में अत्यधिक ओलावृष्टि हुयी थी। इसलिये एक सदी के दौरान किसी एक साल में ऐसा होने को मौसम के बदलते मिजाज का संकेत मानना जल्दबाजी होगी।

प्रश्न : मौसम की इन घटनाओं को भविष्य के लिहाज से किस प्रकार देखते हैं?

उत्तर : यह सही है कि पिछले कुछ सालों में इस साल उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में सबसे कम कोहरा हुआ। जनवरी में औसतन दो सप्ताह तक अत्यधिक घना कोहरा (दृश्यता स्तर शून्य से 50) होता है लेकिन इस साल सिर्फ एक दिन (18 जनवरी) अत्यधिक घना कोहरा दर्ज किया गया। दिसंबर में एक भी दिन अत्यधिक घना कोहरा नहीं हुआ। इसकी मुख्य वजह पश्चिमी विक्षोभ के कारण हवा की सामान्य गति बहाल रहना है और आसमान साफ रहने के कारण धूप की मौजूदगी ने भी कोहरा नहीं बनने दिया। इसी तरह बारिश की मात्रा, हवा की गति और सर्दी के मौसम की अवधि में मामूली विस्तार जैसे मौसम के उतार चढ़ाव देखने को मिले। देखने वाली बात यह होगी कि उतार चढ़ाव यह सिलसिला आगे भी जारी रहता है या नहीं।

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