वॉडर्न ने किया गर्ल्स हॉस्टल की छात्राओं का पानी बंद

उज्जैन/नप्र। अस्थाई व्यवस्था में भी भेदभाव की स्थिति रमाबाई भीमराव अंबेडकर विक्रम विश्व विद्यालय स्थित गर्ल्स होस्टल की छात्राओं को भुगतना पड़ रही है। मामला है नवीन पोस्ट मैट्रिक कन्या छात्रावास की 60 छात्राओं का। उन्हें भवन जर्जर होने के चलते नवीन भवन निर्माण तक रमाबाई भीमराव अम्बेडकर गल्स हॉस्टल में शिफ्ट किया गया था। रमाबाई हॉस्टल की वॉर्डन शोभासिंह उनके साथ भेदभाव अभद्र व्यवहार कर रही है। हॉस्टल से निकालने का दबाव बनाया जा रहा है। मामला विश्वविद्यालय के साथ ही प्रशासन के अधिकारियों की भी जानकारी में भी आ चुका है। मामले में एनएसयूआई ने भी हस्तक्षेप किया है।
उल्लेखनीय है कि नवीन पोस्ट मैट्रिक कन्या छात्रावास की 60 छात्राओं को डेढ़ साल पहले उनके खुद के छात्रावास भवन के जर्जर होने और नवीन भवन निर्माण तक तत्कालीन आदिम जाति कल्याण विभाग जिला संयोजक ने समझौते के तहत विक्रम विश्वविद्यालय के रमाबाई भीमराव अम्बेडकर गर्ल्स हॉस्टल में शिफ्ट करवाया था। आदिम जाति कल्याण विभाग का नवीन भवन इस दौरान बनकर तैयार नहीं हुआ। इसी के चलते विश्वविद्यालय के हॉस्टल में पोस्ट मेट्रिक कन्या छात्रावास की छात्राएं रहने पर मजबूर है। विश्वविद्यालय के हॉस्टल में उसकी खुद की भी लगभग 20 छात्राएं निवासकर अध्ययनरत है। भूतल पर यह छात्राएं रहती हैं और प्रथम तल पर नवीन पोस्ट मेट्रिक कन्या छात्रावास की छात्राएं निवास कर अध्ययनरत है।
विश्वविद्यालय रमाबाई भीमराव अम्बेडकर गर्ल्स हॉस्टल की वार्डन शोभासिंह अपने भवन को खाली कराने के लिए इस हद तक नीचे गिर चुकी हैं कि वे प्रथम तल का पानी आए दिन बंद करवा देती है। यहीं नहीं पोस्ट मैट्रिक छात्रावास की छात्राओं से आए दिन अभद्र व्यवहार करती है। यहाँ तक की जाति सूचक शब्दों का प्रयोग करती है। यह तो सामान्य बाते हैं। इसके अतिरिक्त छात्राओं को लड़ाई झगड़े के लिए उकसाया जा रहा है। गैस सप्लायर को गैस की टंकी प्रथम तल तक नहीं ले जाने दी जाती है। जिसके चलते छात्राओं को टंकी उठाकर ले जाना पड़ती है। ऐसी और भी कई समस्याएं पैदा की जा रही है।
छात्राएं पिछले कई दिनों से पानी की समस्या से जूझ रही है। छात्राओं का कहना है कि हॉस्टल के वार्डन ने ही पानी बंद किया है। वर्तमान में 3 तीन दिनों से वार्डन द्वारा छात्राओं का पानी बंद कर दिया गया व उन्हें लगातार बाहर निकालने की धमकी दी जा रही है। इसके चलते छात्राओं को काफी समस्या का सामना करना पड़ रहा है चूंकि यह होस्टल सुनसान क्षेत्र में स्थित है, इसके बावजूद छात्राओं को रात में बाहर से पानी लाना पड़ रहा है। वार्डन का भेदभाव व द्वेष पूर्ण रवैये के कारण छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
छात्राओं को न्याय दिलाने एनएसयूआई आया आगे
कई दिनों से इन समस्याओं से जूझ रही छात्राओं की समस्याओं के निराकरण के लिए एनएसयूआई आगे आया। रविवार को एनएसयूआई प्रदेश उपाध्यक्ष विजय बोड़ाना मौके पर पहुँचे और छात्राओं की समस्याएं सुनी। श्री बोड़ाना ने कलेक्टर से फोन पर चर्चा कर समस्या से अवगत कराया। कलेक्टर शशांक मिश्रा ने तत्काल मामले को संज्ञान में लेते हुए एडीएम जी.एस डाबर को जांच का जिम्मा दिया। एडीएम ने मौके पर पहुँचकर पंचनामा बनाया। इस दौरान यूनिवर्सिटी के संबंधित अधिकारी कुलसचिव डी. के. बग्गा, छात्र कल्याण संकाय डीन राकेश ढांड, कुलानुशासक के. एन. सिंह आदि भी मौके पर पहँुचे। अधिकारियों ने समस्या का स्थाई निराकरण करने का आश्वासन दिया व दोषी वार्डन को नोटिस दिया। इस अवसर पर सुरेंद्र मरमट शहर अध्यक्ष अजा विभाग, शैलेन्द्र सोलंकी, जिला महासचिव यूकां, धर्मेंद्र पटेल, जिला महासचिव एनएसयूआई आदि मौजूद थे।