प्रकृति के असीमित दोहन के कारण प्राकृतिक आवरण नष्ट हो रहा है – प्रो पाण्डेय

उज्जैन। हम सब धरती के पुत्र हैं। मनुष्य द्वारा किए जा रहे पर्यावरण विध्वंस के कारण आज वैश्विक तापमान बढ़ रहा है। हमारी सृष्टि दो भागों में बंटी हुई है, एक दिव्य और दूसरी आसुरी। वेद में अंतरिक्ष विज्ञान के कई सूत्र विद्यमान हैं। सृष्टि के जन्म और विकास का संकेत वेद में मिलता है। वेदों में कहा गया है कि अंतरिक्ष और पानी में हिंसा मत करो। यज्ञ से पर्यावरण प्रदूषण से मुक्ति मिलती है। प्रत्येक मनुष्य अद्वितीय है। सम्पूर्ण सृष्टि के दो हिस्से हैं – प्राकृतिक और प्राविधिक। प्राकृतिक सृष्टि को प्राविधिक सृष्टि नुकसान पहुंचा रही है। इस सृष्टि में नौ खरब आकाशगंगाएँ हैं। प्रत्येक अपनी अपनी झिल्ली से घिरी हुई हैं। प्राकृतिक आवरण के कारण इनके द्वारा एक दूसरे का नुकसान नहीं होता है। प्रकृति के असीमित दोहन के कारण धरती का प्राकृतिक आवरण नष्ट हो रहा है।

ये उद्गार प्रख्यात वैज्ञानिक एवं प्रधानमंत्री के पूर्व वैज्ञानिक सलाहकार प्रो ओमप्रकाश पांडेय ने विक्रम विश्वविद्यालय में वैश्विक तापमान और पर्यावरण पर विशिष्ट व्याख्यान देते हुए व्यक्त किए। यह विशेष  व्याख्यान महात्मा गांधी के 150 वें जन्मवर्ष के आयोजनों की शृंखला में आयोजित किया गया।

अन्तरिक्ष वैज्ञानिक प्रो पांडेय ने अपने व्याख्यान में कहा कि हम अपने बारे में चिंता नहीं करते हैं। घर के अंदर, बाहर की तुलना में बारह गुना ज्यादा प्रदूषण होता है, लेकिन बाहरी प्रदूषण बढ़ने के कारण महानगरों में घर से बाहर न निकालने के लिए अपील की जा रही है। हमारी कई धार्मिक मान्यताओं के पीछे वैज्ञानिक आधार है। वट, पीपल, आंवला, अशोक, तुलसी आदि  को पूज्य माना गया है,जिनमें अनेक औषधीय गुण होते हैं। अशोक वृक्ष अवसाद को रोकता है। वट वृक्ष स्मरण शक्ति को बढ़ाता है। तुलसी को जल चढ़ाने से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन अलग हो जाते हैं, जो पर्यावरण के लिए हितकारी हैं। कृषि के आधुनिकीकरण के कारण खाद्यान्न में विषाक्तता आ रही है। सेन्दा नमक खाने से एसिडिटी की समस्या दूर होती है। रिफाइंड तेल शरीर को नुकसान पहुँचाते हैं। जिन वनस्पतियों में मैग्नेशियम होता है, उनका सेवन करने से स्मृति तेज होती है।

व्याख्यान सत्र की अध्यक्षता कुलपति प्रो. शीलसिन्धु पांडेय ने की। उन्होंने अन्तरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान के लिए वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो ओमप्रकाश पाण्डेय को प्रतीक चिह्न, शॉल, श्रीफल अर्पित कर सम्मानित किया।

प्रारम्भ में स्वागत भाषण डीएसडब्ल्यू प्रो राकेश ढंड ने दिया। अतिथि स्वागत कुलसचिव डॉ डी के बग्गा, डीएसडब्ल्यू प्रो राकेश ढंड आदि ने किया। इस मौके पर बड़ी संख्या में विभिन्न अध्ययनशालाओं के आचार्य, विद्यार्थीगण उपस्थित थे।

संचालन कुलानुशासक प्रो शैलेंद्रकुमार शर्मा ने किया। आभार कुलसचिव डॉ डी के बग्गा ने व्यक्त किया।