स्तंभकार कांतिलाल नागर की पुस्तक लिखों हमारे विरुद्ध का लोकार्पण

उज्जैन। समाज की विसंगितयों पर शब्दों की मार करती यह कृति श्रद्धेय ठा. शिवप्रतापसिंह जी की भावनाओं के अनुरूप है। उपरोक्त विचार वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. शिव चौरसिया ने स्तम्भकार कांतिलाल नागर की कृति लिखो हमारे विरूद्ध का लोकार्पण करते हुए कही। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विक्रम विश्व विद्यालय के कुलानुशासक एवं समीक्षक डॉ. शैलेन्द्र शर्मा ने कृति पर विस्तार से व्यक्तव्य देते हुए कहा कि इसमें उज्जैन का संवेदनात्मक इतिहास समाया हुआ है। कांतिदा यदि विकृति पर प्रहार करते हैं तो अच्छे काम की प्रशंसा करने में भी कंजूसी नहीं करते। विशेष अतिथि वरिष्ठ पत्रकार क्रांतिकुमार वैद्य ने दादा शिवप्रतापसिंह जी के व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए कृति के महत्वपूर्ण आलेखों पर चर्चा की। प्रेस क्लब के अध्यक्ष विशालसिंह हाड़ा ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए। प्रारंभ में वागदेवी एवं दैनिक अग्निपथ के संस्थापक ठा. शिवप्रतापसिंह जी के चित्र पर पुष्पांजलि एवं दीप प्रज्जवलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। अतिथियों ने कृति लिखो हमारे विरूद्ध का लोकार्पण किया। अतिथि स्वागत अग्निपथ परिवार के वरिष्ठ अनिलसिंह चंदेल, अर्जुनसिंह चंदेल, हरदयालसिंह ठाकुर, पिलकेन्द्र अरोरा, चन्द्रभानसिंह चंदेल, अभिमन्युसिंह चंदेल, एस.एन. शर्मा, सुरेश कुशवाह, पुरुषोत्तम तिवारी आदि ने किया। पुस्तक के सम्पादक वरिष्ठ अभिभाषक सुभाषचन्द्र गौड़ ने कहा कि 29 वर्षों के अंतराल में प्रति सप्ताह लिखे गए इस स्तम्भ शहर का चक्कर को एक कृति में लेना मुश्किल काम था। केवल कुछ ही अंश लिए जा सके हैं। स्वागत उद्बोधन दैनिक अग्निपथ के प्रधान संपादक अनिलसिंह चंदेल ने दिया। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ साहित्यकार श्री श्रीराम दवे ने किया। आभार लोकार्पित पुस्तक के प्रबंध संपादक अभिभाषक पुरुषोत्तम तिवारी ने माना। कृति के लेखक कांतिलाल नागर ने भी कृतज्ञता ज्ञापित की। इस अवसर पर शहर के कई वरिष्ठ अभिभाषक, साहित्यकार, लेखन के क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठजन, पत्रकार, समाजसेवी आदि उपस्थित थे।