कम्प्यूटर बाबा ने खोला अखाड़ा परिषद के खिलाफ मोर्चा, नया अखाड़ा बनाने की तैयारी

इंदौर,  वैष्णव सम्प्रदाय के दिगंबर अनी अखाड़े से निष्कासित कम्प्यूटर बाबा ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के खिलाफ सीधा मोर्चा खोलते हुए बुधवार को आरोप लगाया कि साधु-संतों के 13 अखाड़ों की शीर्ष संस्था भाजपा के इशारे पर काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि वह प्रयागराज (इलाहाबाद) में आगामी 15 जनवरी से लगने वाले कुंभ मेले से पहले नया अखाड़ा बनाने पर विचार कर रहे हैं।

कम्प्यूटर बाबा ने “पीटीआई-भाषा” से कहा, “अखाड़ा परिषद के अनुचित आदेश पर मुझे दिगंबर अनी अखाड़े से निकाल दिया गया, जबकि मैं पवित्र नर्मदा नदी को बचाने का अभियान चला रहा था। अखाड़ा परिषद भाजपा के इशारे पर काम कर रही है।”

नर्मदा नदी की कथित बदहाली के प्रमुख मुद्दे पर सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ संतों को लामबंद करने वाले वैष्णव संप्रदाय (अपने इष्ट देव के रूप में भगवान विष्णु को पूजने वाले हिंदू मतावलम्बी) के इस संत को दिगंबर अनी अखाड़े से एक नवंबर को बाहर कर दिया गया था। उनके खिलाफ इस आरोप के तहत यह सख्त कदम उठाया गया था कि वह दलीय राजनीति में शामिल होकर संतों की गरिमा के विपरीत आचरण कर रहे हैं।

बहरहाल, मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई वाली भाजपा सरकार के खिलाफ कम्प्यूटर बाबा का अभियान दिगंबर अनी अखाड़े से निष्कासन के बाद भी जारी रहा था। उन्होंने यह अभियान सूबे में 28 नवम्बर को हुए विधानसभा चुनावों से महीना भर पहले “संत समागम” के नाम से शुरू किया था।

कम्प्यूटर बाबा ने कहा कि राजनीति में सक्रिय होने वाले वह देश के पहले संत नहीं हैं। लेकिन अखाड़ा परिषद ने उनके खिलाफ “अन्यायपूर्ण” कदम उठाते हुए उन्हें दिगंबर अनी अखाड़े से केवल इसलिये बाहर करा दिया, क्योंकि वह खुलेआम भाजपा के खिलाफ बोल रहे थे।

उन्होंने कहा, “उमा भारती सरीखी संन्यासिन मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री और फिर केंद्रीय मंत्री बन सकती हैं। गोरखनाथ मठ के महंत योगी आदित्यनाथ उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री बन सकते हैं। लेकिन अखाड़ा परिषद को मैं कतई पसंद नहीं हूं, क्योंकि मैं भाजपा के खिलाफ खुलकर बोलता हूं।”

कम्प्यूटर बाबा ने कहा कि वह प्रयागराज में 22 से 30 दिसंबर के बीच देश भर के साधु-संतों को जुटायेंगे और नये अखाड़े के गठन पर उनसे विचार-विमर्श करेंगे।

उधर, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने कम्प्यूटर बाबा के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि साधु-संतों की इस संस्था का किसी भी सियासी दल से कोई जुड़ाव नहीं है।

कम्प्यूटर बाबा के प्रस्तावित नये अखाड़े पर नरेंद्र गिरि ने कहा, “सनातन धर्म की परंपराओं के मुताबिक अखाड़ा परिषद केवल 13 अखाड़ों को मान्यता देती है। हम किसी भी नये अखाड़े को मान्यता नहीं दे सकते।”

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने कम्प्यूटर बाबा पर कांग्रेस के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया और उन पर कटाक्ष किया, “नया अखाड़ा बनाना बच्चों का खेल नहीं है।”

कम्प्यूटर बाबा का असली नाम नामदेव दास त्यागी है। वह मध्यप्रदेश में संतों की संस्था षट्दर्शन साधु मंडल के प्रमुख हैं। सूबे की शिवराज नीत भाजपा सरकार ने कम्प्यूटर बाबा समेत पांच धार्मिक नेताओं को अप्रैल में राज्य मंत्री का दर्जा दिया था। लेकिन कम्प्यूटर बाबा ने इसके कुछ समय बाद ये आरोप लगाते हुए इस दर्जे से इस्तीफा दे दिया था कि शिवराज सरकार ने खासकर नर्मदा को स्वच्छ रखने और इस नदी से अवैध रेत खनन पर रोक लगाने के मामले में संत समुदाय से “वादाखिलाफी” की है।

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