सीबीआई को बाहर रखना भ्रष्टाचार में संप्रभुता घोषित करने जैसा है: जेटली

मुंबई/भोपाल, वित्त मंत्री अरूण जेटली ने शनिवार को कहा कि राज्यों में सीबीआई को मामलों की जांच करने से रोकना भ्रष्टाचार के मामलों में संप्रभुता घोषित करने जैसा है।

दरअसल, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल की सरकारों ने अपने-अपने राज्यों में जांच के लिए सीबीआई को दी गई सहमति वापस लेने का शुक्रवार को फैसला किया था।

जेटली ने कहा कि आंध्र प्रदेश सरकार का कदम ‘‘क्या होने वाला है के भय’’ से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के पास छिपाने के लिए काफी कुछ होता है वे केंद्रीय एजेंसी से डरते हैं।

उन्होंने मुंबई में इकोनॉमिक टाइम्स अवार्ड कार्यक्रम में कहा, ‘‘किसी ने कल भ्रष्टाचार के विषय में यह कहते हुए अपनी संप्रभुता की घोषणा कर दी कि मैं जांच एजेंसियों को नहीं घुसने दूंगा।’’ उन्होंने कहा कि यह शासन का निकृष्टतम रूप है।

इससे पहले, भोपाल में जेटली ने मध्य प्रदेश चुनाव के लिए भाजपा का घोषणापत्र जारी करने के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह कदम केवल वही लोग उठाते हैं जिनके पास छिपाने लायक कोई चीज होती है। जिनको भय है कि आने वाले कल में क्या होने वाला है, क्योंकि इनके हाथ भ्रष्टाचार से रंगे हुए हैं।’’

उन्होंने आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल की सरकारों पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, ‘‘उनको (इस भ्रष्टाचार की) जानकारी है।’’

शारदा चिटफंड घोटाला और नारदा स्टिंग ऑपरेशन की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘केवल सीबीआई को बाहर करने से पश्चिम बंगाल में शारदा-नारदा समाप्त नहीं होगा, जिसमें तृणमूल कांग्रेस का बहुत बड़ा नेतृत्व वर्ग शामिल है। ’’

जेटली ने कहा, ‘‘और आंध्र प्रदेश में तो शायद वहां की सरकार को उसकी विशेष जानकारियां हैं तथा किसी को बचाने के लिए यह कदम उठाया गया है।’’

हालांकि, उन्होंने इस सवाल का जवाब नहीं दिया कि आंध्र प्रदेश सरकार ने किसे बचाने के लिए सीबीआई के प्रवेश पर रोक लगाई है।

उन्होंने कहा कि भारत में एक संघीय ढांचा है और उसके तहत सीबीआई का गठन शुरूआत में केंद्र सरकार के कर्मचारियों की जांच के लिए किया गया और फिर बाद में उसे राज्यों में बहुत गंभीर तरह के मामलों की जांच करने का भी अधिकार दिया गया, जो या तो राज्यों द्वारा या अदालतों द्वारा सौंपे जाते हैं।