पश्चिम एशिया से आई धूल से प्रभावित होता है भारत की ग्रीष्म ऋतु का मॉनसून : अध्ययन

वाशिंगटन, पश्चिम एशिया के रेगिस्तानों से आने वाली धूल और काला धुआं हिमालय पर्वत श्रृंखला की बर्फीली चादर पर जमा हो जाता है और भारत में गर्मी के मॉनसून की तीव्रता को प्रभावित करता है। एक अध्ययन में यह जानकारी सामने आई है।

नासा द्वारा विकसित शक्तिशाली वायुमंडलीय प्रतिरूप का इस्तेमाल करते हुए अमेरिका के मेरीलैंड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने पाया कि गहरे ऐरोसॉल- सूर्य की किरणों को सोखने वाले धूल एवं काले धुएं जैसे वायुवाहित कण- मॉनसून शुरू होने से पहले बसंत में तिब्बती पठार की बर्फ के ऊपर जमा हो जाते हैं।

इन स्याह एरोसॉल की वजह से बर्फ सूर्य की रोशनी ज्यादा सोखती है और ज्यादा तेजी से पिघलती है। परिणाम सुझाते हैं कि बर्फ पर काली परत पड़ने के लिए इन स्याह ऐरोसॉल में पश्चिम एशिया से हवा से बहकर आई धूल सबसे अधिक जिम्मेदार होती है।

पिछले कुछ समय में बसंत के दौरान धूल अधिक जमा होने के परिणामस्वरूप तिब्बती पठार पर बर्फ की चादर पतली होती जा रही जिससे मैदान पर और उसके ऊपर मौजूद हवा का तापमान बढ़ जाता है।

इसी के चलते वे सारी कड़ियां कमजोर होती चली जाती हैं जो भारत में गर्मी के मौसम के मॉनसून की तीव्रता के लिए जिम्मेदार होती हैं।