छत्तीसगढ़ का चुनाव मोदी सरकार पर जनमत संग्रह नहीं : रमन सिंह

रायपुर, चौथी बार छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री चुने जाने का भरोसा जता रहे रमन सिंह ने कहा है कि अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों पर राज्य विधानसभा चुनाव का कुछ असर पड़ सकता है लेकिन इसे केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के लिए किसी जनमत संग्रह के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

पिछले 15 साल से छत्तीसगढ़ की सत्ता पर काबिज सिंह ने इन संभावनाओं को खारिज किया कि राज्य में कृषि कर्ज माफी के कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के वादे का आगामी विधानसभा चुनावों पर कोई असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यहां किसानों को पहले ही शून्य ब्याज दर पर कर्ज दिया गया है।

अस्सी के दशक में राजनीति में आने से पहले आयुर्वेदिक डॉक्टर रहे 66 वर्षीय सिंह ने एक साक्षात्कार में पीटीआई-भाषा से कहा कि उनकी सरकार ने कृषि के क्षेत्र में जो काम किया है उसके और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन के चलते राज्य में ‘‘सत्ता के पक्ष में’’ लहर है।

विपक्षी पार्टियों का कहना है कि लगातार तीसरा कार्यकाल पूरा कर रहे सिंह के खिलाफ जोरदार सत्ता विरोधी लहर है।

छत्तीसगढ़ में दो चरणों में मतदान होगा। 12 नवंबर को पहले चरण में छत्तीसगढ़ विधानसभा की 18 सीटों पर मतदान होगा जिनमें सिंह का राजनांदगांव निर्वाचन क्षेत्र भी शामिल है जबकि राज्य में शेष 72 सीटों पर 20 नवंबर को दूसरे चरण का मतदान होगा। सभी 90 सीटों पर मतगणना 11 दिसंबर को होगी। उसी दिन चार अन्य राज्यों मध्य प्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान और मिजोरम में भी मतगणना होगी।

छत्तीसगढ़ में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है हालांकि राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की पार्टी के बसपा के साथ गठबंधन ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।

भाजपा की जीत पर भरोसा जताते हुए सिंह ने कहा कि राज्य के चुनावों का अगले साल के लोकसभा चुनाव पर ‘‘थोड़ा असर’’ पड़ सकता है।

साथ ही उन्होंने कहा कि राज्य के चुनावों को मोदी सरकार के जनमत संग्रह के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

सिंह लगातार चौथी बार राज्य में भाजपा की सरकार बनाने की दौड़ में हैं। कांग्रेस राज्य में केवल एक बार पहले विधानसभा चुनाव में सत्ता में रही जब छत्तीसगढ़ को मध्य प्रदेश से अलग करके राज्य बनाया गया था।

नक्सली हिंसा को लेकर विपक्षी नेता अपनी चुनावी रैलियों में रमन सिंह सरकार पर सुरक्षा के मोर्चे पर विफल रहने का आरोप लगा रहे हैं।

सिंह ने कहा कि बस्तर क्षेत्र में नक्सलियों के लिए गुस्सा अब भी है और अगर वह फिर से सत्ता में आते हैं तो क्षेत्र में शांति सुनिश्चित करना उनकी प्राथमिकता होगी।

पूरे नक्सल प्रभावित क्षेत्र में पहले चरण में मतदान होगा जिसमें सिंह का गढ़ माने जाने वाला राजनांदगांव निर्वाचन क्षेत्र भी आता है।

सिंह ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की मौजूदगी ने राज्य के चुनाव को इस बार त्रिकोणीय मुकाबला बना दिया है लेकिन उनकी चुनौती पिछली बार जितनी मुश्किल नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘मैं कहूंगा कि पिछला विधानसभा चुनाव सबसे मुश्किल था जब दरभा घाटी में नक्सली हमले में कांग्रेस नेता मारे गए थे।’’ उन्होंने कहा कि उस समय बस्तर में नक्सल समस्या की स्थिति पर उनकी सरकार पर सवाल उठाए गए थे।

सलवा जुडुम पर सिंह ने कहा कि यह आंदोलन नक्सलियों को लेकर लोगों के बीच गुस्से के कारण पनपा जो अब भी चल रहा है लेकिन ऐसे आंदोलन लंबे समय तक नहीं चल सकते।

साल 2005 में शुरू किए सलवा जुडुम आंदोलन की शुरुआत कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा ने की थी। इस आंदोलन का उद्देश्य माओवादियों के खिलाफ स्थानीय निवासियों का बल तैयार करना था। कर्मा की नक्सलियों ने 2013 में हत्या कर दी थी।

राज्य में 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 49 सीटें मिली थी जबकि कांग्रेस के खाते में 39 सीटें आई थी और बसपा को एक सीट मिली थी।

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