शिक्षक ही राष्ट्र का निर्माता होते हैं

उज्जैन। कलियुग में गुरु का स्थान शिक्षक ने ले लिया है। वे मात्र अपने छात्रों को शिक्षा नहीं देते, अपितु उनका बौद्धिक, चारित्रिक मार्गदर्शन करते हुए योग्य नागरिक तैयार करते हैं। वास्तविकता में शिक्षक ही राष्ट्र के निर्माता होते हैं। गर्गेजी व जोशीजी का जीवन काफी प्रेरणास्पद व अनुकरणीय है। उन्होंने शिक्षा में योगदान के अलावा नगर के प्राचीन वैभव को संजोये रखने व सामाजिक परम्पराओं के आदर्श निर्वहन में भी योगदान दिया। ऐसे शिक्षाविदों को हमारा नमन है।
विक्रम राष्ट्रीय परिषद उज्जयिनी द्वारा हरसिद्धी गार्डन, हरसिद्धी रोड उज्जैन पर आयोजित संस्थापक व शिक्षाविदद्वय वसंत गर्गे व अरूण जोशी स्मृति सम्मान समारोह में ऊर्जा मंत्री पारसचन्द्र जैन ने उक्त विचार किये गये। समारोह में उज्जैन के प्राचीन वैभव को संजोए रखने में योगदान तथा सामाजिक परम्पराओं आदर्श निर्वहन के निमित्त परिषद के संस्थापकगण वसंत गर्गे स्मृति सारस्वत सम्मान पत्रम् श्री वैभव गर्गे को व श्री अरुण जोशी स्मृति सारस्वत सम्मान पत्रम् श्री अश्विन जोशी को समर्पित किया।
अध्यक्षता परिषद के अध्यक्ष पं. विजय त्रिवेदी रतलामी गुरु ने की। समारोह को ओमप्रकाश कसेरा, प्रतापसिंह ठाकुर, महेश पायलवाला आदि वक्ताओं ने संबोधित किया व जोशीजी व गर्गेजी से जुड़े संस्मरण सुनाये। सम्मान पत्र का वाचन परिषद के प्रवक्ता रूपेश काबरा ने किया। कार्यक्रम का संचालन परिषद के सचिव अरविंद उपाध्याय ने किया। इस अवसर पर गुरुदेव उपाध्याय, सुरेश राठौर, संजीव खन्ना, गोपाल शर्मा, गणेश गौड़, राजकुमार जटिया, गिरीश शास्त्री आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे। जानकारी सचिव पं. अरविन्द उपाध्याय व प्रवक्ता रूपेश काबरा ने दी।